नई दो-रंगी पोशाक लागू
श्री अमृतसर साहिब, 5 फरवरी 2026: श्री हरिमंदर साहिब (स्वर्ण मंदिर) के सेवादारों की वर्दी में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इस परिवर्तन का उद्देश्य परंपरा, अनुशासन और गौरव को और अधिक मजबूत करना है। नई व्यवस्था के तहत अब श्री दरबार साहिब में तैनात सेवादार पहली बार दो रंगों—पीला और गहरा नीला—की वर्दी पहनेंगे। इसके साथ ही कंधों पर खंडे की नक्काशी और सफेद रंग का हजूरिया भी सेवादारों की नई पहचान बनेगा।
सेवादारों की वर्दी में इससे पहले चार बार बदलाव हो चुके हैं। वर्ष 1960-70 तक वर्दी पूरी तरह पारंपरिक थी। 1990 में मानक नीली वर्दी और पहचान चिह्न जोड़े गए। 2000 में कंधों और छाती पर पहचान चिह्न के साथ “श्री दरबार साहिब श्री अमृतसर” अंकित किया गया, जबकि 2015 से वर्दी मुख्य रूप से नीले रंग की रही। अब एक बार फिर वर्दी के रंग और स्वरूप में परिवर्तन किया गया है।
इस बदलाव की घोषणा तीन दिन पहले की गई थी और इसे 5 फरवरी से आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। यह निर्णय शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति द्वारा लिया गया। नई वर्दी में दोनों कंधों पर सुंदर उकेरा हुआ खंडा शामिल है, जो सिख धर्म में साहस, सेवा और सत्य का प्रतीक है। छाती पर “श्री हरिमंदर साहिब, अमृतसर” स्पष्ट अक्षरों में अंकित किया गया है।
इसके अलावा सेवादार सफेद हजूरिया पहनेंगे, जो पवित्रता, विनम्रता और सेवा का प्रतीक है। पगड़ी को सजाने के लिए विशेष कपड़े की बेल्ट और खंडे भी प्रदान किए जाएंगे। इन सभी बदलावों से सेवादारों की पोशाक और अधिक गरिमामय व प्रभावशाली बन गई है।
श्री दरबार साहिब के मैनेजर राजिंदर सिंह रूबी ने कहा कि यह बदलाव पूरी सोच-विचार के बाद किया गया है। नई वर्दी से सेवादारों की पहचान और सम्मान बढ़ेगा, श्रद्धालुओं के लिए उन्हें पहचानना आसान होगा और प्रशासनिक व्यवस्था को और सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।






