चंडीगढ़, 01 फरवरी 2026: पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई), चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने सल्फास (एल्युमिनियम फॉस्फाइड) ज़हर के इलाज में बड़ी सफलता हासिल की है। इस ज़हर को देश के सबसे घातक ज़हरों में से एक माना जाता है। पीजीआई के आंतरिक चिकित्सा विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में पहली बार यह सिद्ध हुआ है कि इंट्रावेनस लिपिड इमल्शन नामक थैरेपी इस जानलेवा ज़हर से पीड़ित मरीजों की जान बचाने में प्रभावी हो सकती है।
यह महत्वपूर्ण शोध एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें उत्तर भारत की एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या पर किए गए इस कार्य को मान्यता दी गई है। यह अध्ययन पीजीआई के आंतरिक चिकित्सा विभाग में किया गया।
इस शोध में विभागाध्यक्ष एवं डीन डॉ. संजय जैन की अहम भूमिका रही। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों के इलाज का उनका व्यापक अनुभव गंभीर स्थिति में मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ। इस शोध को पीजीआई के मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेल (MERC) से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जो मरीजों के हित में और समाज के लिए उपयोगी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस रैंडमाइज्ड क्लिनिकल स्टडी का नेतृत्व डॉ. मनदीप सिंह भाटिया, एसोसिएट प्रोफेसर, आंतरिक चिकित्सा विभाग ने किया। डॉ. सौरभ चंद्रभान शारदा सह-शोधकर्ता रहे, जबकि विभाग के अन्य डॉक्टरों ने भी अध्ययन में योगदान दिया।
गौरतलब है कि उत्तर भारत में एल्युमिनियम फॉस्फाइड ज़हर एक बड़ी जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए इसके व्यापक उपयोग के कारण ज़हर के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। इस तरह का शोध, जो सीधे तौर पर किसानों और ग्रामीण आबादी को लाभ पहुंचाता है, देश में मरीज-केंद्रित अनुसंधान और चिकित्सकीय नवाचार में पीजीआई की अग्रणी भूमिका को और मजबूत करता है।






