कोटा, 24 जनवरी 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने छात्रों की मानसिक सेहत को मजबूत करने और उन्हें प्रभावी करियर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक अहम नीतिगत सुधार किया है। इसके तहत सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों में करियर काउंसलर और सामाजिक-भावनात्मक (सोशल-इमोशनल) काउंसलर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया गया है।
यह फैसला कोटा स्थित अधिवक्ता सुजीत स्वामी और कुछ मनोविज्ञान विशेषज्ञों द्वारा जुलाई 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के बाद लिया गया है। याचिका में छात्रों के बीच बढ़ते अकादमिक तनाव, संरचित करियर मार्गदर्शन की कमी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौतियों को उजागर किया गया था।
सीबीएसई ने इस संबंध में अपने एफिलिएशन बायलॉज, 2018 की धारा 2.4.12 में संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, अब स्कूलों में योग्य और प्रशिक्षित काउंसलरों की नियुक्ति अनिवार्य होगी, ताकि छात्रों को समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और करियर संबंधी सही मार्गदर्शन मिल सके।
जनहित याचिका में यह भी मांग की गई थी कि सभी स्कूलों में एक समान और मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता ढांचा विकसित किया जाए, जिससे छात्रों में तनाव, अवसाद और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। सीबीएसई के इस फैसले को छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम बताया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल छात्रों की मानसिक सेहत बेहतर होगी, बल्कि उन्हें भविष्य की पढ़ाई और करियर को लेकर सही दिशा भी मिल सकेगी।






