ट्रंप ने दी सीधे सैन्य हमले की चेतावनी
तेहरान/वॉशिंगटन, 12 जनवरी 2026 : ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए जारी हिंसक दमन अब एक गंभीर मानवाधिकार संकट का रूप ले चुका है। ईरानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी और सख्ती से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, जिसके चलते पूरी दुनिया पर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।
खूनखराबे के आंकड़े: मौत का तांडव
मानवाधिकार संगठनों की ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, इस हिंसा में अब तक 544 लोगों की जान जा चुकी है।
प्रदर्शनकारी: 496 मौतें
सुरक्षा बल: 48 मौतें
गिरफ्तारियां: बीते दो हफ्तों में 10,600 से अधिक लोगों को जेलों में बंद किया गया है।
ईरानी सरकार ने देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद कर दी हैं, जिससे जमीनी हकीकत और वास्तविक जनहानि का आकलन करना मुश्किल हो गया है।
ईरानी संसद में गूंजे “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे
ईरानी संसद के कट्टरपंथी स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने वैश्विक शक्तियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि अमेरिका या इज़राइल ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल दिया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे और जहाज़ ईरानी मिसाइलों के निशाने पर होंगे। संसद के भीतर सदस्यों ने “अमेरिका को मौत” के नारे लगाकर युद्ध का माहौल और गर्मा दिया।
राष्ट्रपति ट्रंप का सख्त रुख
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह ईरान के खिलाफ “बहुत सख्त विकल्पों” पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया:
“अगर ईरान ने कोई गलती की, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा, जैसा इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। हम साइबर हमलों से लेकर सीधे सैन्य कार्रवाई तक, हर कदम के लिए तैयार हैं।”
वैश्विक समुदाय की चुप्पी पर सवाल
रिपोर्ट में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि इतने बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के हनन के बावजूद संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा रहे हैं। सूचना नाकाबंदी का फायदा उठाकर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर और भी ज्यादा बेरहमी ढा रहे हैं।
तेहरान समेत ईरान के कई बड़े शहर इस समय सैन्य छावनियों में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आज़ादी और अधिकारों के लिए सड़कों पर डटे हुए हैं।






