चंडीगढ़, 8 जनवरी 2026: पंजाब सरकार राज्य के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (PSCB) में विलय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस कदम का उद्देश्य पूंजी पर्याप्तता सुनिश्चित करना, बड़े वाणिज्यिक बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और प्रशासनिक खर्चों की दोहराव वाली व्यवस्था को कम करना है।
‘द ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के वित्त और सहकारिता विभाग के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल, वित्त मंत्री हरपाल चीमा के नेतृत्व में, बीते दो दिनों में मुंबई में शीर्ष नियामक बैंक अधिकारियों से मिला। इस दौरान दो प्रस्ताव रखे गए। पहला प्रस्ताव राज्य के सभी 20 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को PSCB में विलय करने से संबंधित है, जबकि दूसरा प्रस्ताव जालंधर, कपूरथला, नवांशहर और होशियारपुर को छोड़कर 16 जिला सहकारी बैंकों के विलय का है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उपरोक्त चार डीसीसीबी द्वारा प्रस्तावित विलय के खिलाफ चल रहे मुकदमों को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) फिलहाल केवल 16 डीसीसीबी के विलय के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है। इन 16 बैंकों की सामान्य सभाओं ने पहले ही स्वैच्छिक रूप से PSCB में विलय के प्रस्ताव पारित कर दिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से एक ‘मेगा बैंक’ का गठन होगा, जिससे पूंजी शक्ति और लाभप्रदता में वृद्धि होगी। वर्तमान में राज्य सरकार को अक्सर घाटे में चल रहे इन बैंकों में पूंजी डालनी पड़ती है, खासकर तब जब उनका सीआरएआर (कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेशियो) 9 प्रतिशत से नीचे चला जाता है। सीआरएआर संभावित ऋण चूक या निवेश घाटे से निपटने के लिए बेहद अहम माना जाता है।
सरकार का मानना है कि इस विलय से सहकारी बैंकिंग प्रणाली को मजबूती मिलेगी और राज्य के सहकारी बैंकों को एक स्थिर और प्रतिस्पर्धी ढांचा प्रदान किया जा सकेगा।





