NIOS से जोड़कर दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने की तैयारी
नई दिल्ली, 25 दिसंबर 2025: देश में स्कूल छोड़ चुके और परीक्षा में असफल छात्रों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने एक अहम फैसला लिया है। वर्ष 2026 से केंद्र सरकार कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में फेल होने वाले सभी छात्रों की व्यवस्थित रूप से ट्रैकिंग शुरू करेगी और उन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) से जोड़कर दोबारा दाखिले का अवसर दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्रालय यह भी विचार कर रहा है कि राज्यों को समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) योजना के तहत दिए जाने वाले फंड का उपयोग NIOS की फीस चुकाने में किया जा सकता है या नहीं, ताकि आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ा जा सके।
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) के सचिव संजय कुमार ने बताया कि वर्ष 2024 में देशभर के सभी बोर्डों में कक्षा 10वीं और 12वीं में फेल छात्रों की कुल संख्या लगभग 50 लाख रही। उन्होंने कहा कि ड्रॉपआउट और असफल छात्रों को दूसरा मौका देने के लिए ओपन स्कूलिंग व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
संजय कुमार ने कहा,
“2026 से हम कक्षा 10 और 12 में फेल होने वाले सभी छात्रों की ट्रैकिंग शुरू करेंगे। यह डेटा NIOS के साथ साझा किया जाएगा, ताकि इन छात्रों से सक्रिय रूप से संपर्क कर उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जा सके।”
यह ट्रैकिंग भारत की राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा डाटाबेस — यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के माध्यम से की जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को फंड दिया जाता है और मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि क्या NIOS फीस के बराबर राशि उपलब्ध कराकर आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ा जा सकता है।
शिक्षा मंत्रालय के लिए एक और बड़ी चिंता छात्रों का ड्रॉपआउट है। हालांकि पिछले एक दशक में ड्रॉपआउट दर में कमी आई है, लेकिन केंद्र सरकार का लक्ष्य कक्षा 12 तक 100 प्रतिशत छात्र प्रतिधारण (Retention) सुनिश्चित करना है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-15 से 2023-24 के बीच:
प्रारंभिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 5.1% से घटकर 2.3% हो गई,
मिडिल स्कूल स्तर पर 3.8% से घटकर 3.5% हुई,
सेकेंडरी स्तर पर यह 13.5% से घटकर 8.2% रह गई।
संजय कुमार ने कहा,
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो भी बच्चा स्कूल में दाखिल हो, वह कम से कम कक्षा 12 तक पढ़ाई पूरी करे। इसी कारण ओपन स्कूलिंग सिस्टम को मजबूत करना बेहद जरूरी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कई छात्र ऐसे होते हैं जिन्हें काम करने के साथ पढ़ाई जारी रखनी होती है और ओपन स्कूलिंग उन्हें यह लचीलापन प्रदान करती है।






