नई दिल्ली, 21 दिसंबर 2025 : भारत ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी भागीदारी को और गहरा करते हुए ओमान के साथ समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ओमान यात्रा के दौरान हुआ। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दीपन्विता मजूमदार के अनुसार, यह करार द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार, एमएसएमई-आधारित निर्यात को बढ़ावा देने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
यह समझौता व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ाने पर केंद्रित है और विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण तथा इंजीनियरिंग उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। ये सभी क्षेत्र रोजगार सृजन से सीधे जुड़े हुए हैं और सीईपीए के तहत ओमान के बाजार में इन्हें बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
सेवाओं के क्षेत्र में भी समझौता काफी व्यापक है। इसके अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, कंप्यूटर सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, व्यावसायिक सेवाएं तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) को शामिल किया गया है, जिससे भारतीय सेवा प्रदाताओं को ओमान में नई संभावनाएं मिलेंगी।
समझौते की एक बड़ी खासियत यह है कि ओमान ने भारतीय वस्तुओं के लिए अपने 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की पेशकश की है, जिससे मूल्य के आधार पर भारत के लगभग 99.4 प्रतिशत निर्यात को लाभ मिलेगा। इसके बदले में भारत ने ओमान से आयात होने वाले उत्पादों के लिए 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायतें दी हैं, जो ओमान से भारत के लगभग 94.8 प्रतिशत आयात को कवर करती हैं। कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था अपनाई गई है, जिससे सीमित मात्रा में रियायती दरों पर आयात संभव होगा।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का ओमान को निर्यात 4.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो भारत के कुल निर्यात का लगभग 0.9 प्रतिशत है। हालांकि FY23 के बाद निर्यात में हल्की सुस्ती देखी गई, लेकिन दीर्घकालिक रुझान मजबूत रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में भारत-ओमान निर्यात 12.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है, जो भारत के कुल निर्यात की तुलना में कहीं अधिक है। अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि से थोड़ा अधिक रहा, जिससे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
आयात पक्ष की बात करें तो FY25 में भारत का ओमान से आयात बढ़कर 6.6 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसका मुख्य कारण पेट्रोलियम उत्पादों की अधिक खरीद रही। पिछले पांच वर्षों में आयात 12.2 प्रतिशत CAGR से बढ़ा है। इसके चलते FY25 में भारत का ओमान के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, हालांकि चालू वित्त वर्ष में निर्यात में तेजी के साथ यह घाटा धीरे-धीरे कम हो रहा है।
भारत के निर्यात में ओमान को भेजे जाने वाले उत्पादों में निर्मित वस्तुओं का वर्चस्व है, जिनमें इंजीनियरिंग सामान और दवाइयां प्रमुख हैं। ये दोनों ही क्षेत्र सीईपीए के सबसे बड़े लाभार्थी माने जा रहे हैं। समझौते के तहत लक्षित क्षेत्र भारत के ओमान को कुल निर्यात का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को सीधा लाभ मिलेगा।
आयात के मोर्चे पर कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद भारत के ओमान से आयात का मुख्य हिस्सा हैं। खास बात यह है कि ओमान से आने वाले पेट्रोलियम उत्पादों की यूनिट कीमत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के अन्य देशों की तुलना में कम है, जिससे ओमान भारत के लिए एक किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बनता है। यह भारत के तेल आयात बिल को नियंत्रित करने और आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने में मदद कर सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के आकलन के अनुसार, भारत–ओमान सीईपीए ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक व्यापार संरचनाएं बढ़ते शुल्क और भू-राजनीतिक बदलावों के कारण पुनर्संरेखित हो रही हैं। यह समझौता भारत की विदेशी बाजारों तक पहुंच को मजबूत करेगा, एमएसएमई निर्यातकों को समर्थन देगा और ऊर्जा आयात में स्थिरता बढ़ाएगा।
कुल मिलाकर, यह करार निर्यात बढ़ाने, रोजगार सृजन और व्यापार प्रतिस्पर्धा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण में भारत की व्यापक व्यापार रणनीति को और मजबूती प्रदान करेगा।






