चंडीगढ़ 14 दिसंबर:पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वेटरनरी शिक्षा से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि बी.वी.एस.सी. एवं ए.एच. कोर्स के दौरान इंटर्नशिप अवधि में किसी भी निजी वेटरनरी कॉलेज द्वारा ट्यूशन फीस वसूलना कानूनन अस्वीकार्य और शोषणकारी है। अदालत ने ऐसे कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे इंटर्नशिप के दौरान छात्रों से वसूली गई पूरी ट्यूशन फीस तीन महीनों के भीतर वापस करें।
यह फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाया। अदालत ने कहा कि इंटर्नशिप पढ़ाई नहीं, बल्कि एक फुल-टाइम सेवा है, जिसमें छात्र अस्थायी रूप से पंजीकृत वेटरनरी डॉक्टर के तौर पर कार्य करते हैं और इसके लिए उन्हें मानदेय दिया जाना अनिवार्य है।
खंडपीठ ने वेटरनरी काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का विश्लेषण करते हुए कहा कि इंटर्नशिप के दौरान छात्र आपात सेवाएं, नाइट ड्यूटी, रविवार और छुट्टियों में भी अस्पतालों और क्लीनिकों में सेवाएं देते हैं। ऐसे में उनसे ट्यूशन फीस लेना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह इंटर्नशिप अलाउंस को अप्रत्यक्ष रूप से वापस लेने जैसा है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो काम सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता, उसे अप्रत्यक्ष रूप से भी अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गुरु अंगद देव वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी तथा उसके अधीन सरकारी कॉलेज इंटर्नशिप के दौरान किसी प्रकार की ट्यूशन फीस नहीं लेते, बल्कि छात्रों को मानदेय देते हैं। इसके विपरीत निजी कॉलेजों द्वारा फीस वसूली को अदालत ने अनुचित लाभ और छात्रों का आर्थिक शोषण करार दिया।
निजी कॉलेज की इस दलील को भी अदालत ने खारिज कर दिया कि वह एक अनुदान-रहित संस्था है और अपनी फीस संरचना तय करने के लिए स्वतंत्र है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि फीस तय करने की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं कि संस्थान शोषण या मुनाफाखोरी में लिप्त हो जाए।
हालांकि, अदालत ने इंटर्नशिप अलाउंस की दर बढ़ाने संबंधी मांग पर कोई सीधा आदेश नहीं दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल इंटर्नशिप के लिए न्यूनतम या समान दर तय करने का कोई कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है और इस विषय पर नीति बनाना संबंधित सक्षम प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र है।
अदालत ने याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निजी कॉलेज को निर्देश दिया कि इंटर्नशिप अवधि के दौरान वसूली गई पूरी ट्यूशन फीस केवल याचिकाकर्ता छात्रों को तीन महीनों के भीतर वापस की जाए।






