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अमेरिका में वीज़ा नियम और सख्त: ट्रंप प्रशासन ने 85,000 से अधिक वीज़े रद्द किए, भारतीयों पर सबसे बड़ा असर

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2025: अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे लोगों, खासकर भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए वीज़ा नियमों को बेहद सख्त बना दिया है। जनवरी 2025 से अब तक अमेरिका ने दुनिया भर के 85,000 से अधिक वीज़े रद्द कर दिए हैं, जिनमें से 8,000 से ज्यादा वीज़े छात्रों के बताए जा रहे हैं।

H-1B की जांच और कड़ी, वीज़ा इंटरव्यू मार्च 2025 तक स्थगित

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा की जांच प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है। इसके चलते कई इंटरव्यू दिसंबर के मध्य से मार्च 2025 तक के लिए टाल दिए गए हैं।

अमेरिकी दूतावास ने चेतावनी दी है कि जिन आवेदकों को इंटरव्यू कैंसिलेशन ईमेल मिल चुका है, वे तय समय पर एंबेसी न पहुँचें—उन्हें एंट्री नहीं मिलेगी।

अब सोशल मीडिया की भी होगी जांच

नए नियमों के तहत अब वीज़ा आवेदकों को अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल सार्वजनिक करनी होगी।

इमीग्रेशन वकीलों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी आवेदक की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच करेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह अमेरिका की सुरक्षा या जन-व्यवस्था के लिए खतरा तो नहीं है।

स्टेट डिपार्टमेंट का कहना है कि—“अब हर वीज़ा निर्णय एक राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णय माना जाएगा।”

अपराध, राजनीतिक गतिविधियों और विवादित पोस्ट भी बने वीज़ा रद्द होने का कारण

अमेरिकी डेटा के अनुसार, पिछले एक साल में रद्द किए गए कई वीज़े इन कारणों से जुड़े थे—

शराब पीकर गाड़ी चलाना (DUI)

चोरी, मारपीट जैसे अपराध

राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना

गाज़ा संघर्ष को लेकर हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लेना

चैरिटी लीडर चार्ली कर्क की हत्या पर कथित “जश्न” मनाना

अब 5.5 करोड़ वीज़ाधारकों की होगी ‘निरंतर निगरानी’

अगस्त में जारी नीति के अनुसार, अब अमेरिका अपने सभी 5.5 करोड़ से अधिक वीज़ाधारकों की लगातार मॉनिटरिंग करेगा।

अर्थात वीज़ा मिलने के बाद भी व्यक्ति की गतिविधियों की नियमित जांच की जाएगी।

H-1B पर 1 लाख डॉलर फीस भी बड़ा झटका

ज्ञात हो कि पहले ही H-1B वीज़ा पर ट्रंप प्रशासन लगभग 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) की भारी-भरकम फीस लगा चुका है, जिसने भारतीय IT प्रोफेशनलों और विदेशी टैलेंट पर बड़ा असर डाला है।

अमेरिका की बढ़ती सख्ती से भारतीय छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और कंपनियों पर आने वाले महीनों में और दवाब देखने को मिल सकता है।

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