नई दिल्ली, 26 नवंबर 2025 (ANI): केंद्र सरकार घरेलू स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी (Rare Earth) चुम्बकों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये की एक नई प्रोत्साहन योजना को बुधवार को मंजूरी दे सकती है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव आज आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विचार के लिए रखा गया है।
7 वर्ष की अवधि वाली योजना
इस योजना को 7 वर्ष की अवधि के लिए तैयार किया गया है ताकि भारत की महत्वपूर्ण खनिजों पर आयात निर्भरता कम हो सके और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के लिए आवश्यक सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके।
योजना के तहत देश में लगभग 6,000 टन रेयर अर्थ मैग्नेट्स के उत्पादन की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
ये चुम्बक इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, पवन ऊर्जा टर्बाइन, रक्षा प्रणालियों और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी
वित्त मंत्रालय से मिल चुकी है मंजूरी
सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय इस योजना को पहले ही मंजूरी दे चुका है, जिसके बाद आज दोपहर 12:30 बजे शुरू हुई कैबिनेट बैठक में इसे अंतिम स्वीकृति के लिए लिया जा रहा है।
खनन मंत्रालय बना रहा है ढांचा
खनन मंत्रालय इस योजना को इस प्रकार तैयार कर रहा है कि वैश्विक और घरेलू दोनों कंपनियों को भारत में निवेश को बढ़ावा मिले, मूल्यवर्धन भारत में ही हो सके और रणनीतिक सामग्रियों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
चीन से आयात पर निर्भरता घटाने का प्रयास
वर्तमान में भारत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स का अधिकांश हिस्सा चीन से आयात करता है। प्रस्तावित प्रोत्साहन योजना से देश में प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और मैग्नेट निर्माण क्षमताओं में बड़ा निवेश होने की उम्मीद है, जो अभी काफी कमज़ोर हैं।
सूत्रों के मुताबिक, यह योजना सरकार के व्यापक लक्ष्य— महत्वपूर्ण खनिज सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने—के अनुरूप है।
मंत्रिमंडल की मंजूरी जल्द मिलने की संभावना है।






