HomePunjabपंजाब विधानसभा का ऐतिहासिक प्रस्ताव — तीन शहर घोषित होंगे ‘पवित्र शहर’

पंजाब विधानसभा का ऐतिहासिक प्रस्ताव — तीन शहर घोषित होंगे ‘पवित्र शहर’

स्री आनंदपुर साहिब, 24 नवंबर 2025

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज श्री आनंदपुर साहिब की पावन धਰती पर आयोजित पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि एक  सिख होने के नाते, गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस पवित्र समागम में ऐसा प्रस्ताव पेश करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे गुरु साहिबान की सोच हमेशा ‘सरबत दा भला’ की रही है, इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि श्री अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो — इन तीनों तख्तों वाले शहरों को पंजाब के आधिकारिक पवित्र शहर (Official Holy Cities) घोषित किया जाए। सत्र में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

 गुरु तेग बहादुर जी की कुर्बानी को याद किया

CM मान ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने बताया कि गुरु साहिब ने इस क्षेत्र की ज़मीन खरीदकर स्वयं श्री आनंदपुर साहिब नगर की स्थापना की थी। गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी लंबे समय तक इस पावन स्थल पर निवास किया और यहीं पर खालसा पंथ की साजना की गई।

 मीट, शराब और तंबाकू पर लगेगी ‘पूरी तरह पाबंदी’

मुख्यमंत्री के प्रस्ताव में इन तीनों पवित्र शहरों के लिए सख्त नियम लागू करने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार—

* मीट, शराब और तंबाकू की बिक्री व सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।

* सरकार चाहती है कि गुरु की नगरी में नशा और मांस पूरी तरह वर्जित रहे।

‘सर्ब धर्म कमेटी’ का गठन होगा

मान ने सुझाव दिया कि इन शहरों में एक इंटरफेथ कमेटी (सर्ब धर्म कमेटी) बनाई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक सौहार्द और सामाजिक सद्भावना को मजबूत करना होगा।

विकास और सुंदरता के लिए बजट, केंद्र से मांगी जाएगी सहायता

प्रस्ताव में कहा गया कि—* पंजाब सरकार इन शहरों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष बजट आवंटित करेगी।

* साथ ही, केंद्र सरकार से भी वित्तीय सहायता की मांग की जाएगी ताकि इन्हें विश्व-स्तरीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जा सके।

इस ऐतिहासिक प्रस्ताव के बाद सत्र में विभिन्न दलों ने इस मुद्दे पर चर्चा की। पंजाब विधानसभा का यह विशेष सत्र राज्य के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज किया जाएगा।

 

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