दिड़बा, 1 जून 2026: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), संगरूर द्वारा कृषि विभाग के सहयोग से गांव कमालपुरा, ब्लॉक दिड़बा में “संतुलित उर्वरक प्रबंधन” विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 50 किसानों ने भाग लिया।
इस शिविर के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने किसानों को फसलों में संतुलित उर्वरक प्रबंधन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फसलों में उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया और फास्फोरस, के आवश्यकता से अधिक उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने धान और बासमती में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के संतुलित उपयोग संबंधी वैज्ञानिक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यदि गेहूं की फसल में अनुशंसित मात्रा में डीएपी उर्वरक डाला गया हो तो खरीफ सीजन में धान की फसल में फास्फोरस युक्त उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने धान में यूरिया के उचित उपयोग के लिए खेत की पडलिंग (कद्दू) से पहले सूखे खेत में यूरिया का प्रयोग न करने की सलाह दी। इसके अलावा उन्होंने मिट्टी परीक्षण के लिए नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि की भी जानकारी दी।
डॉ. रविंदर कौर, सहायक प्रोफेसर (बागवानी), ने किसानों को बागवानी फसलों में उर्वरक प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने गर्मी के मौसम में फलदार पौधों और सब्जियों की देखभाल संबंधी सुझाव भी दिए तथा सब्जियों की नई और उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी प्रदान की।
डॉ. मनजीत कौर, कृषि विकास अधिकारी, सुनाम ने किसानों को पीएयू द्वारा प्रमाणित कम अवधि वाली धान की किस्मों की खेती के लाभों के बारे में बताया। उन्होंने धान में मधरेपन और हल्दी रोग संबंधी विस्तृत जानकारी दी तथा किसानों को धान की सीधी बुआई और खरीफ मक्का की खेती के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने किसानों को किसान आईडी और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में किसानों को कृषि साहित्य वितरित किया गया। इस शिविर को सफल बनाने में कृषि विभाग के अधिकारियों तथा प्रगतिशील किसान सरदार हरप्रीत सिंह का विशेष योगदान रहा।






