नई दिल्ली, 26 मई 2026: इबोला वायरस को लेकर दुनिया भर में चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अफ्रीकी देशों कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रही इस बीमारी ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus के अनुसार इबोला से मरने वालों की संख्या बढ़कर 220 हो गई है और संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
25 मई को आयोजित अफ्रीकी स्वास्थ्य नेताओं की बैठक में अफ्रीकी सीडीसी के महानिदेशक Jean Kaseya ने कहा कि इबोला का खतरा बेहद गंभीर है और अब और अधिक लोगों की मौत बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने वायरस को फैलने से रोकने और स्थायी समाधान खोजने पर जोर दिया।
भारत ने जारी की सावधानी एडवाइजरी
भारत फिलहाल इस खतरनाक वायरस से सुरक्षित बताया जा रहा है, लेकिन एहतियात के तौर पर सरकार ने लोगों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी है।
WHO की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक Soumya Swaminathan ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति है। उन्होंने बताया कि इबोला का दुर्लभ “बुंडीबुगियो” स्ट्रेन फैल रहा है, जिसके लिए अभी तक न तो कोई प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है और न ही तय इलाज विकसित हो पाया है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में कई मरीजों की सामान्य जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि संक्रमण कई सप्ताह पहले ही फैल चुका था। बाद में जीन सीक्वेंसिंग के जरिए इसकी पहचान बुंडीबुगियो स्ट्रेन के रूप में हुई। विशेषज्ञों के अनुसार संभावित रूप से एक हजार से अधिक लोग पहले ही संक्रमित हो चुके हो सकते हैं।
मौत दर 30 से 50 फीसदी तक
विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला की सबसे बड़ी चिंता इसकी ऊंची मृत्यु दर है, जो करीब 30 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है। WHO फिलहाल विभिन्न इलाज और क्लीनिकल ट्रायल विकल्पों पर विचार कर रहा है। कुछ मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचारों की भी सिफारिश की गई है।
इबोला के बुंडीबुगियो स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने के लिए University of Oxford का समूह Serum Institute of India के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इबोला के शुरुआती लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार इबोला के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, जी मिचलाना, सिरदर्द और शरीर पर चकत्ते शामिल हैं। समय पर जांच और उचित इलाज से मौतों को कम किया जा सकता है।
भारत ने कांगो को जरूरी चिकित्सा उपकरणों की पहली खेप भेजी है ताकि वहां जांच प्रक्रिया को तेज किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि रिसर्च, डायग्नोस्टिक तकनीक और वैक्सीन विकास में भारत अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत में कितना खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में घबराने जैसी स्थिति नहीं है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के दौर में पूरी तरह निश्चिंत नहीं रहा जा सकता, इसलिए सतर्कता और तैयारी बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने कहा कि नए और पुराने वायरस का खतरा भविष्य में भी बना रहेगा, लेकिन समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाकर बड़े जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।