अंतरराष्ट्रीय लेखक अनिल कुमार भारती ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र
पटियाला 19 अप्रैल, 2026 : प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय लेखक एवं शिक्षा शास्त्री श्री अनिल कुमार भारती ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को एक पत्र लिखकर वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त अध्यापकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टैट) की अनिवार्यता से छूट देने की पुरजोर मांग की है। श्री भारती ने इस पत्र के माध्यम से देशभर के उन लाखों शिक्षकों की पीड़ा और उनके भविष्य से जुड़ी चिंताओं को प्रधानमंत्री जी के समक्ष रखा है, जो दशकों से शिक्षा जगत में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
अनुभव और सेवा शर्तों का सम्मान आवश्यक प्रैस नोट जारी करते हुए श्री भारती ने कहा कि वर्ष 2011 से पहले सरकारी सेवा में आए अध्यापक उस समय की राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित सभी कठोर चयन प्रक्रियाओं और शैक्षणिक मापदंडों को पूरा करने के बाद ही नियुक्त हुए थे। उन्होंने कहा, “इन अध्यापकों ने अपनी जिंदगी के 25-30 वर्ष समाज को शिक्षित करने और राष्ट्र निर्माण में समर्पित कर दिए हैं। अब उनके कार्यकाल के अंतिम पड़ाव पर उन्हें पुनः पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए कहना उनके लंबे अनुभव और समर्पण का अनादर है।”
कानूनी और नैतिक आधार पर उठाई मांग शिक्षा शास्त्री श्री भारती ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक नियमों के अनुसार कोई भी नई सेवा शर्त भविष्य की नियुक्तियों के लिए लागू होनी चाहिए, न कि 25-30 साल पुरानी नियुक्तियों पर। उन्होंने इसे ‘नैसर्गिक न्याय’ के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस समय इन शिक्षकों की भर्ती हुई थी, उन्होंने उस समय के सभी आवश्यक ‘शिक्षक मापदंड’ पूरे किए थे, अतः अब उन पर नए नियम थोपना व्यावहारिक नहीं है।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील श्री भारती ने माननीय प्रधानमंत्री जी से विनम्र आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों के आलोक में केंद्र सरकार इस मामले में गंभीरता से हस्तक्षेप करे। उन्होंने माँग की कि देश की शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाले इन अनुभवी गुरुओं को टैट (TET) परीक्षा से विशेष छूट प्रदान की जाए ताकि वे अपने शेष सेवाकाल को बिना किसी मानसिक तनाव के पूर्ण कर सकें।






