मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही खाद डालने के लिए किया प्रेरित
मूनक/खनौरी, 11 अप्रैल, 2026 : रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना के दिशा-निर्देशों के तहत फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा ग्राम भूंदड़ भैणी में एक किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य मिट्टी परीक्षण के महत्व और फास्फोरस उर्वरक के उचित प्रबंधन के बारे में जानकारी देना था।
संतुलित उर्वरक उपयोग से बढ़ेगी पैदावार
शिविर की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही खाद डालने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि पैदावार में भी वृद्धि होगी।
डॉ. गर्ग ने मौके पर मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि का विस्तार से प्रदर्शन किया। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे यूरिया खाद का उपयोग संयम से करें और एक साथ कई बोरी यूरिया डालने से परहेज करें।
धान की खेती और जैविक स्वास्थ्य
डॉ. अशोक ने धान में जिंक की कमी को पूरा करने के लिए केवल अनुशंसित मात्रा का ही उपयोग करने पर जोर दिया। जैविक खादों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि धान की पौध के लिए ‘एज़ोस्पिरिलम‘ का उपयोग झाड़ बढ़ाने में सहायक होता है और मिट्टी के जैविक स्वास्थ्य में भी सुधार करता है।
नई किस्मों और बीजों की जानकारी
शिविर के दौरान PAU द्वारा अनुशंसित किस्मों जैसे PR 131, PR 132, और PR 126 के बारे में विस्तार से बताया गया।
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नई किस्म PR 133: इस किस्म के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह रोपाई के बाद लगभग 111 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
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बासमती: पूसा बासमती 1509 और पंजाब बासमती 7 में खाद की आवश्यकता और ‘झंडा रोग’ (Foot Rot) की रोकथाम के लिए बीज शोधन (Seed Treatment) पर भी चर्चा की गई।







