Sunday, June 7, 2026
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लेफ्टिनेंट जनरल अमित कबथियाल ने संभाली वज्र कोर की कमान, लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया का कार्यकाल पूरा

जालंधर, 1 अप्रैल 2026: भारतीय सेना की प्रतिष्ठित वज्र कोर (‘डिफेंडर्स ऑफ पंजाब’) की कमान बुधवार को लेफ्टिनेंट जनरल अमित कबथियाल ने संभाल ली। उन्होंने यह जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया से ग्रहण की।

कमान संभालने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल कबथियाल ने वज्र शौर्य स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सभी रैंकों से उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारियों को बनाए रखने, बदलती चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढालने और भारतीय सेना के मूल्यों व परंपराओं को कायम रखने का आह्वान किया।

लेफ्टिनेंट जनरल अमित कबथियाल भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र हैं और गढ़वाल राइफल्स के दूसरे पीढ़ी के अधिकारी हैं। उन्हें तीन दशकों से अधिक का समृद्ध सैन्य अनुभव प्राप्त है। उन्होंने काउंटर इंसर्जेंसी अभियानों, उत्तरी सीमाओं और नियंत्रण रेखा पर महत्वपूर्ण तैनातियों के साथ-साथ ऑपरेशन रक्षक, राइनो, विजय और पराक्रम में भी भाग लिया है।

उनके नेतृत्व अनुभव में पर्वतीय युद्ध में विशेषज्ञ स्काउट्स बटालियन की कमान, उत्तरी सीमाओं पर नई इन्फैंट्री बटालियन का गठन, मणिपुर में असम राइफल्स सेक्टर का नेतृत्व और पूर्वी सिक्किम में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माउंटेन डिवीजन की कमान शामिल है। इसके अलावा उन्होंने लाओस (Lao PDR) में भारतीय सेना प्रशिक्षण टीम के साथ कार्य करते हुए भारत की सैन्य कूटनीति में भी योगदान दिया है।

उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल (वीरता) और बार टू सेना मेडल सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वज्र कोर की कमान संभालने से पहले वे ब्रह्मास्त्र कोर में चीफ ऑफ स्टाफ के पद पर तैनात थे।

वहीं लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया जुलाई 2024 से वज्र कोर की कमान संभाल रहे थे। उनके नेतृत्व में कोर ने ऑपरेशनल तैयारियों, संगठनात्मक पुनर्गठन और नई तकनीकों के समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति की। उनके कार्यकाल के दौरान ‘भैरव बटालियन’ और ‘अश्नि प्लाटून’ की स्थापना, निगरानी और संचार तंत्र का पुनर्गठन तथा अन्य सेनाओं व सिविल प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन राहत के दौरान प्रभावी नेतृत्व प्रदान करते हुए कोर की तत्परता और क्षमता को और मजबूत किया। अब वे आर्मी वार कॉलेज, महू में कमांडेंट के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे, जहां वे भविष्य के सैन्य नेतृत्व को दिशा देंगे।

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