नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नया आयकर कानून आम करदाताओं, खासकर नौकरीपेशा वर्ग के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है। इस नए ढांचे में जहां टैक्स दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, वहीं नियमों को सरल बनाकर सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और समझने में आसान बनाया गया है।
टैक्स बोझ में कोई बड़ा बदलाव नहीं
नए प्रावधानों के तहत टैक्स स्लैब और दरें पहले जैसी ही रहेंगी। Old Tax Regime और New Tax Regime दोनों विकल्प जारी रहेंगे। हालांकि नया टैक्स सिस्टम डिफॉल्ट रहेगा, लेकिन करदाता अपनी सुविधा के अनुसार पुराना विकल्प चुन सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारियों पर कोई अतिरिक्त टैक्स बोझ नहीं पड़ेगा।
₹12.75 लाख तक आय पर टैक्स फ्री
नए टैक्स सिस्टम के तहत ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। नौकरीपेशा लोगों को ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे कुल ₹12.75 लाख तक की आय टैक्स फ्री हो जाएगी। यह मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
सरल हुआ टैक्स सिस्टम
अब “फाइनेंशियल ईयर” और “असेसमेंट ईयर” की जटिलता खत्म कर दी गई है। इसकी जगह केवल “टैक्स ईयर” शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे नए और सामान्य करदाताओं के लिए प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी।
रिटर्न फाइलिंग के नियम लगभग वही
आईटीआर भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी। हालांकि रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है, जिससे करदाताओं को ज्यादा समय मिलेगा।
कर्मचारियों के लिए बढ़े लाभ
HRA में राहत: अब बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों को भी 50% तक HRA छूट के दायरे में शामिल किया गया है।
बच्चों के भत्ते में बढ़ोतरी:
शिक्षा भत्ता ₹100 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह प्रति बच्चे
हॉस्टल भत्ता ₹300 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह प्रति बच्चे
मील बेनिफिट: ₹50 से बढ़ाकर ₹200 प्रति भोजन (टैक्स फ्री)
गिफ्ट सीमा: नियोक्ता से मिलने वाले उपहार की टैक्स फ्री सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है
Form 16 की जगह Form 130
अब पारंपरिक Form 16 की जगह Form 130 लागू किया जाएगा, जो अधिक डिजिटल और सटीक होगा।
पेंशनभोगियों को भी राहत
पेंशनर्स को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा। साथ ही ब्याज आय पर छूट ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है।
कम होगी टैक्स से जुड़ी परेशानियां
नए कानून के तहत जांच (Scrutiny) का समय सीमित किया गया है और नियमों को स्पष्ट बनाया गया है, जिससे विवाद और परेशानी कम होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, यह नया आयकर कानून “सरलता और राहत” के सिद्धांत पर आधारित है, जो आम करदाताओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।






