पटियाला, 14, मार्च 2026 (मनोज वर्मा): पटियाला के पर्यावरण प्रेमी, अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षाविद् अनिल कुमार भारती ने राष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बेसहारा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक क्रांतिकारी ‘पंच-सूत्री गोवंश रक्षा एवं संवर्धन कार्ययोजना’ तैयार की है। उन्होंने यह विस्तृत वैज्ञानिक शोध पत्र केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेजा है। यह कार्ययोजना भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ जैसे संकल्पों को जमीन पर उतारने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
योजना पर अमल करने से गोवंश और आम नागरिक दोनों ही दुर्घटनाओं का शिकार होने से बच सकेंगे।
इस कार्ययोजना का मुख्य आधार सभी गांवों में गौचर (शामलाट) भूमि पर गौशालाओं का निर्माण करना, उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें ‘ऊर्जा उत्पादन केंद्र’ के रूप में विकसित करना है। श्री भारती ने प्रस्ताव दिया है कि देश की सभी गौशालाओं की छतों और गौचर भूमि पर सोलर पैनल लगाकर ‘गौ-सौर ऊर्जा कॉरिडोर’ बनाया जाए। इससे न केवल देश के ऊर्जा संकट का समाधान होगा, बल्कि गौशालाएं बिजली बेचकर अपना आर्थिक खर्च भी स्वयं वहन कर सकेंगी।
इसके साथ ही पंजाब के नूरमहल स्थित दिव्या ज्योति जागृति संस्थान में संचालित सफल ‘कामधेनु गौशाला’ मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने का सुझाव भी दिया गया है, जहां आधुनिक विज्ञान और प्राचीन परंपरा के समन्वय से ‘जीरो वेस्ट’ तकनीक का सफल प्रयोग हो रहा है।
कार्ययोजना में पर्यावरण संरक्षण और जन सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। श्री भारती ने श्मशान घाटों में लकड़ी के स्थान पर सनातन धर्म के ग्रंथों में वर्णित पवित्र गोबर और पंचगव्य से बने ‘गौ-काष्ठ’ (गोबर के लट्ठे) के उपयोग को 50 से 100 प्रतिशत तक अनिवार्य करने की वकालत की है, जिससे हर वर्ष करोड़ों पेड़ों की कटाई रोकी जा सकेगी।
सड़क दुर्घटनाओं और फसलों के नुकसान को रोकने के लिए बेसहारा गोवंश की डिजिटल जियो-टैगिंग और एक केंद्रीय ‘काउ वेलफेयर पोर्टल’ बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि प्रशासन और आम जनता के बीच पारदर्शिता बनी रहे।
ग्रामीण स्व-रोजगार और तकनीक के समन्वय के लिए इस योजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक पशु चिकित्सा प्रणाली के उपयोग पर जोर दिया गया है। प्रत्येक जिले में 24×7 पशु एंबुलेंस 1962 सेवा और अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने के साथ-साथ पढ़े-लिखे युवाओं को एग्री-टेक क्षेत्र से जोड़ने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई है।
इसके साथ ही समाज के अनुभवी और सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों को ‘सम्माननीय पर्यवेक्षक’ के रूप में नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है, ताकि उनके अनुभव का लाभ प्रबंधन और अनुशासन बनाए रखने में मिल सके।
श्री भारती ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके पूजनीय पिता स्वर्गीय श्री ओमप्रकाश कौशिश जी के सेवा आदर्शों से प्रेरित यह कार्ययोजना न केवल गोवंश की रक्षा करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक फार्मिंग और नवीकरणीय ऊर्जा का केंद्र बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस वैज्ञानिक शोध को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए, जिससे भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत हो सके।
अनिल कुमार भारती
गोवंश एवं पर्यावरण प्रेमी,
अंतरराष्ट्रीय लेखक और शिक्षाविद्
संपर्क: +91 7973126853
ईमेल: [anilbharti1967@gmail.com]






