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पंजाब सरकार का मिशन ‘चढ़दी कला’ जारी: अब तक 1143 गांवों में बांटा गया मुआवज़ा, 35 करोड़ से अधिक की राहत राशि वितरित

चंडीगढ़, 13 नवंबर, 2025 : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने राज्य के बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब तक 1143 गांवों में घरों, पशुओं और फसलों के नुकसान का मुआवज़ा वितरित किया जा चुका है। राहत वितरण के तीसरे चरण के दौरान, लगातार दूसरे दिन राज्य सरकार ने 35 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि लोगों तक पहुंचाई।

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, अमृतसर, फाजिल्का, फिरोजपुर, गुरदासपुर, जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर, मानसा, संगरूर और एस.बी.एस. नगर जिलों में लगभग 70 स्थानों पर राहत वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

फिरोजपुर जिले में विधायक रणबीर सिंह भुल्लर, रजनीश दहिया, नरेश कटारिया और फौजा सिंह सरारी ने अलग-अलग कार्यक्रमों में करीब 3,000 किसानों को 16.68 करोड़ रुपये का मुआवज़ा वितरित किया।

डेरा बाबा नानक क्षेत्र में विधायक गुरदीप सिंह रंधावा ने गांव शाहपुर गोराइया, भगताना तुलियां, अगवान, शकरी और मछराला के 935 प्रभावित परिवारों को 3.71 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी। वहीं, श्री मुक्तसर साहिब जिले में विधायक जगदीप सिंह काका बराड़ ने 270 लाभार्थियों को मंजूरी पत्र वितरित किए।

लोपोके उपमंडल (अमृतसर) के गांव तूत, मोतला, जय राम कोट और भग्गूपुर बेट में एस.डी.एम. संजीव शर्मा ने लगभग 26 लाख रुपये के मंजूरी पत्र बांटे। सभी लाभार्थियों को राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।

प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है जिसने बाढ़ प्रभावित परिवारों को सबसे अधिक मुआवज़ा दिया है।

क्षतिग्रस्त घरों के लिए राशि बढ़ाकर 40,000 प्रति घर की गई है (पहले 6,500)।

फसल क्षति पर किसानों को 20,000 प्रति एकड़ मुआवज़ा दिया जा रहा है — जो देश में सबसे अधिक है।

पशुधन हानि पर: दुधारू पशु 37,500, गैर-दुधारू पशु 32,000, बछड़ा 20,000 और पोल्ट्री पक्षी 100 प्रति पक्षी मुआवज़ा दिया जा रहा है।

प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार मिशन चढ़दी कला” के तहत यह सुनिश्चित कर रही है कि हर पात्र परिवार को पारदर्शी तरीके से, समय पर मुआवज़ा मिले। साथ ही, पंजाब सरकार ने देश में पहली बार किसानों को “जिसदा खेत, उसदी रेत” नीति के तहत अपने खेतों से रेत निकालने का अधिकार देकर उन्हें अपनी जमीन बहाल करने का सशक्त अवसर भी दिया है।

 

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