‘रब जैसा है अहसास पंजाबी का…‘
जगत गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, पटियाला में सजी काव्य महफिल
पटियाला, 20 फरवरी 2026: भाषा विभाग पंजाब द्वारा निदेशक स. जसवंत सिंह ज़फ़र के नेतृत्व में, ‘पटियाला साहित्य उत्सव’ के दौरान मातृभाषा दिवस को समर्पित एक भव्य कवि दरबार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जगत गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के स्टेट कॉलेज ऑफ एजुकेशन स्थित कैंपस में संपन्न हुआ।
इस समागम में विख्यात लेखक प्रो. (डॉ.) सुहिंदरबीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रो. परवीन कुमार, डॉ. कुलदीप सिंह और कवि सतबीर सिंह विशिष्ट अतिथि थे, जबकि शिरोमणि कवि दर्शन बुट्टर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
काव्य महफिल की मुख्य झलकियाँ:
- शुरुआत: डॉ. सुहिंदरबीर सिंह ने अपनी कविता ‘अखियां विच अत्थ्रू..‘ से कवि दरबार का आगाज़ किया।
- व्यंग्य और सामाजिक सरोकार: दर्शन बुट्टर ने अपनी कविता ‘जून‘ के माध्यम से समाज में मुखौटा पहनकर घूमने वाले लोगों पर तीखा कटाक्ष किया। अमरजीत कसक और अमरजीत कौंके ने आधुनिक प्रेम और सामाजिक परिस्थितियों पर विचार व्यक्त किए।
- राजनीति और व्यवस्था पर चोट: हरदीप सब्भरवाल ने वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष किया, जबकि राजवीर मत्ता ने अपनी नज़्म के जरिए मेहनतकश मजदूरों की बात की।
- विविध रंग: सतीश विद्रोही ने पुआधी भाषा में हास्य-व्यंग्य के रंग बिखेरे। कुलवंत खनौरी ने अपनी कविता ‘रब वरगा अहसास ए पंजाबी दा…‘ के जरिए मातृभाषा के प्रति सम्मान प्रकट किया। अवतारजीत सिंह ने अपनी प्रस्तुति को तरन्नुम (लय) में पेश कर माहौल को संगीतमय बना दिया।
- अन्य कवि: महफिल में दविंदर पटियालवी (बेटियों पर), हरप्रीत संधू (भाईचारे पर), नवदीप मुंडी (दृष्टिकोण में बदलाव पर) और डॉ. पुष्पेंद्र खोखर (मां बोली पर) ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सम्मान और समापन:
यूनिवर्सिटी के पंजाबी विभाग के प्रमुख डॉ. अमरजीत सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। भाषा विभाग की ओर से अनुसंधान अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने मंच संचालन किया और सभी का धन्यवाद व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. जसविंदर सिंह, डॉ. धनवंत कौर और प्रो. कृपाल कज़ाक जैसी कई नामी हस्तियां और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में भाषा विभाग और यूनिवर्सिटी द्वारा सभी कवियों और मेहमानों को सम्मानित किया गया।






