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बच्चा गोद लेने के इच्छुक माता-पिता किसी बिचौलिए के माध्यम से या सीधे तौर पर बच्चा खरीदने की कोशिश न करें

बल्कि कानून के अनुसार ही गोद लें – वरजीत वालिया

बच्चा गोद लेने के लिए सरकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है – डिप्टी कमिश्नर

पटियाला, 10 फरवरी 2026: पटियाला के डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने कहा है कि भारत में रहने वाले जो माता-पिता बच्चा गोद लेने के इच्छुक हैं, वे किसी भी अस्पताल या किसी बिचौलिए से सीधे तौर पर बच्चा खरीदने की कोशिश न करें, क्योंकि ऐसा करना पूरी तरह गैर-कानूनी और अपराध है।

आज यहां अपने कार्यालय में एक दंपती को नवजात शिशु को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सौंपते हुए डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि भारत में बच्चा गोद लेने की केवल एक ही सही और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसे CARA (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) के माध्यम से पूरा किया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चा गोद लेने के इच्छुक कोई भी दंपती या माता-पिता सरकारी वेबसाइट पर ही ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

वरजीत वालिया ने बताया कि लोगों को कानून के बारे में जागरूक होना बेहद जरूरी है, क्योंकि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2025 के तहत किसी अस्पताल या किसी व्यक्ति से बच्चा खरीदना मानव तस्करी की श्रेणी में आता है, जो एक गंभीर कानूनी अपराध है। ऐसे मामलों में पकड़े जाने पर भारी जुर्माना और कई वर्षों की सजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि कभी भी किसी व्यक्ति द्वारा जल्दी बच्चा दिलाने के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या पुलिस को जानकारी दी जा सकती है।

भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि इसके लिए इच्छुक माता-पिता को सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी के पास पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद विशेष बाल गृह द्वारा माता-पिता के घर का निरीक्षण किया जाता है, जिसमें उनकी शारीरिक, मानसिक और वित्तीय स्थिति का आकलन किया जाता है। इसके उपरांत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी द्वारा बच्चे का चयन कर किसी योग्य बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने योग्य घोषित करने के बाद माता-पिता को बच्चे की प्रोफाइल दी जाती है, जिसे वे आरक्षित कर सकते हैं।

डिप्टी कमिश्नर ने आगे बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के दौरान SAA द्वारा जिला बाल सुरक्षा अधिकारी के माध्यम से डिप्टी कमिश्नर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया जाता है। संपूर्ण प्रक्रिया की जांच के बाद डिप्टी कमिश्नर द्वारा गोद लेने के आदेश जारी किए जाते हैं। गोद लेने के बाद बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र माता-पिता के नाम पर जारी किया जाता है।

इस अवसर पर जिला बाल सुरक्षा अधिकारी शायना कपूर ने बताया कि यदि कोई माता-पिता अपने बच्चे को नहीं रख सकते हैं, तो वे बच्चे को अवैध रूप से किसी को न दें और न ही बच्चे को कोई नुकसान पहुंचाएं। जिला प्रशासन पटियाला द्वारा बाल निकेतन, लाहौरी गेट, पटियाला में ‘भंगूड़ा’ (पालना) लगाया गया है, जहां माता-पिता बच्चे को छोड़ सकते हैं। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कॉल करके भी बच्चे को सरेंडर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दोनों ही स्थितियों में माता-पिता या सूचना देने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती।

फोटो कैप्शन: गोद लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक दंपती को बच्चा सौंपते हुए डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया। उनके साथ जिला बाल सुरक्षा अधिकारी शायना कपूर भी दिखाई दे रही हैं।

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