फगवाड़ा को आज भी नहीं भूले
चंडीगढ़, 9 फरवरी 2026: पहली बार टी-20 विश्व कप में हिस्सा ले रही इटली क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर खिलाड़ी जसप्रीत सिंह भले ही पिछले 22 वर्षों से विदेश में रह रहे हों, लेकिन अपने जड़ शहर फगवाड़ा और पंजाब से उनका लगाव आज भी बरकरार है। दस साल की उम्र में माता-पिता के साथ इटली के बर्गामो शहर जाने वाले जसप्रीत आज भी अपनी मातृभाषा और भारतीय संस्कृति से जुड़े हुए हैं।
जसप्रीत के लिए इटली में शुरुआती दिन आसान नहीं थे। उनके पिता तीर्थ सिंह और मां जसवीर कौर को एक अनजान देश में फैक्ट्री मजदूर के रूप में काम करना पड़ा। जसप्रीत बताते हैं कि इटली जाना उनके परिवार के लिए बड़ा फैसला था, लेकिन नई जगह और नई परिस्थितियों को लेकर चिंता भी थी। उन्हें सबसे ज्यादा फिक्र इस बात की थी कि वे क्रिकेट कैसे खेल पाएंगे, क्योंकि यूरोपीय देशों में क्रिकेट का बुनियादी ढांचा सीमित है।
इसके बावजूद जसप्रीत ने बर्गामो क्रिकेट क्लब से जुड़कर अपने सपने को आगे बढ़ाया। परिवार की मदद के लिए उन्होंने इलेक्ट्रिशियन का दो साल का कोर्स भी पूरा किया। स्थानीय गुरुद्वारे में मिले भारतीय प्रवासियों के सहयोग से उन्होंने अपने क्रिकेट कौशल को निखारने का रास्ता पाया।
आगे चलकर जसप्रीत इंग्लैंड पहुंचे, जहां उन्होंने बर्मिंघम एंड डिस्ट्रिक्ट प्रीमियर लीग में खेलना शुरू किया। वहां टर्फ विकेट पर खेलने का अनुभव मिला और खर्च पूरे करने के लिए उन्होंने उबर कार भी चलाई। बाएं हाथ के गेंदबाज जसप्रीत ने 2019 में नॉर्वे के खिलाफ इटली की राष्ट्रीय टीम के लिए डेब्यू किया।
इटली टीम 2024 टी-20 विश्व कप के बेहद करीब पहुंची थी, लेकिन आयरलैंड से हार के कारण सपना अधूरा रह गया। हालांकि जून 2025 में यूरोपीय क्षेत्रीय क्वालीफायर में शीर्ष स्थान हासिल कर टीम ने टी-20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर लिया।
जसप्रीत सिंह के लिए भारत आना सिर्फ अपनी मातृभूमि पर लौटना ही नहीं, बल्कि देश में मौजूद विश्वस्तरीय क्रिकेट सुविधाओं का अनुभव हासिल करने का भी एक खास मौका है।






