तिरुवनंतपुरम, 8 फरवरी 2026: केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार द्वारा धान के अतिरिक्त उत्पादन को “बोझ” कहे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि केंद्र का यह रवैया न केवल किसानों के खिलाफ है, बल्कि केरल राज्य के हितों के भी विपरीत है। विजयन की यह टिप्पणी उस पत्र के बाद आई है, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने केरल सरकार से धान किसानों को दिए जाने वाले अतिरिक्त बोनस को रोकने के लिए कहा है।
केरल सरकार राज्य के धान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा 6.31 रुपये प्रति किलो अतिरिक्त बोनस देती है। मुख्यमंत्री विजयन ने सवाल उठाते हुए कहा, “जब कॉरपोरेट्स के कर्ज माफ किए जा सकते हैं, तो किसानों को दिया जाने वाला बोनस बोझ कैसे बन गया?”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह बोनस रोका गया तो इससे खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के संयोजक टी.पी. रामकृष्णन ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे किसान हतोत्साहित होंगे और देश की खाद्य सुरक्षा कमजोर पड़ेगी।
मुख्यमंत्री विजयन ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र का यह कदम अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से जुड़े संभावित व्यापार समझौतों से जुड़ा हो सकता है। केंद्र सरकार ने अपने पत्र में राज्यों को धान के बजाय दालों, तिलहन और मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी है, ताकि पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित किया जा सके।
हालांकि, केरल के कृषि मंत्री पी. प्रसाद ने केंद्र की इस सिफारिश को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि केरल में धान की खेती पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की मेहनत का सम्मान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केरल सरकार ने दो टूक कहा है कि वह किसानों के अधिकारों और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगी।






