नई दिल्ली, 3 नवंबर, 2025: सुप्रीम कोर्ट में आज (सोमवार) आवारा कुत्तों के आतंक पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसमें देश भर के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया। इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाली घटनाओं के प्रति गंभीर रुख अपनाया।
मुख्य सचिवों ने माफी मांगी
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन में चूक के लिए पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने माफी को स्वीकार कर लिया, लेकिन साथ ही यह चेतावनी दी कि यदि भविष्य में अदालत के आदेशों का उल्लंघन हुआ तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी दफ्तरों में कुत्तों को खिलाने पर रोक
आज की सुनवाई में कोर्ट ने सरकारी दफ्तरों में कुत्तों को खिलाने की प्रथा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। अदालत ने इस समस्या के बढ़ने का मुख्य कारण सरकारी कार्यालयों में कुत्तों को खिलाने को बताया। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि वे कुछ ही दिनों में सरकारी इमारतों में कुत्तों को खिलाने पर रोक लगाने का औपचारिक आदेश जारी करेंगे।
पीड़ितों को राहत, डॉग लवर्स पर सख्ती
कुत्ते के हमलों से प्रभावित लोगों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों से संबंधित सभी हस्तक्षेप आवेदनों को मंजूरी दी। इसके अलावा, कुत्तों के पक्ष में हस्तक्षेप करने वाले व्यक्तियों और NGOs पर ₹25,000 से ₹2 लाख तक जमा करने का आदेश भी जारी किया गया।
अदालत ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है और 7 नवंबर को एक नया आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद 28 जुलाई से चल रहा है, जब बच्चों में रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर अदालत ने मामले की सुनवाई शुरू की थी। 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR से लेकर पूरे देश में आवारा कुत्तों की समस्या पर कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी, जब कोर्ट इस मामले में नया आदेश जारी करेगा।






