Saturday, June 20, 2026
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प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान बढ़ाएं आय, बचाएं मिट्टी और पर्यावरण : सुभाष बराला

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत ग्राम ललौदा में किसान गोष्ठी आयोजित 

टोहाना 20 जून, 2026 (संजीव शर्मा): राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने किसानों का आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाएं। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में बढ़ती उत्पादन लागत, भूमि की घटती उर्वरता और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता बन गई है। यह खेती की ऐसी पद्धति है जो कम लागत में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करती है।

राज्यसभा सांसद सुभाष बराला शनिवार को ग्राम ललौदा में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत आयोजित किसान गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद ने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को प्रतिवर्ष आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से सुरक्षा प्रदान कर रही है। इसके अलावा कृषि यंत्रीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सुभाष बराला ने कहा कि राज्य सरकार भी किसानों के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों की फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जा रही है तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अधिकाधिक फसलों की खरीद कर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण, बागवानी को बढ़ावा देने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार पर विशेष बल दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसान रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर सकते हैं, जिससे खेती की लागत घटेगी और भूमि की उर्वरता में सुधार होगा। प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है तथा पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।

राज्यसभा सांसद ने कहा कि किसानों का उत्साह और सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में किसान आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का विस्तार न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी किसानों से प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए समृद्ध किसान, स्वस्थ धरती और स्वावलंबी कृषि के संकल्प को साकार करने की अपील की।

गोष्ठी में हमेटी जींद के मास्टर ट्रेनर डा. सुभाष चंद्र ने किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, जैविक संसाधनों के उपयोग, भूमि की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण तथा खेती की लागत कम कर आय में वृद्धि के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी । विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों से अवगत कराया तथा उनके प्रश्नों का समाधान किया।

इस अवसर पर एसडीओ मुकेश मेहला, कृषि विशेषज्ञ डा. अजय ढिल्लों, देवीलाल सरपंच ललौदा, कुलदीप सरपंच प्रतिनिधि गाँव डांगरा, दलजीत नैन, दिनेश भाकर, रणधीर भाकर, विरेंद्र  भाकर, सुरेंद्र ललौदा, सुरेश भड़िया, अधिकारीगण एंव जागरूक किसान साथी उपस्थित रहें

 

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