बाल साहित्यकार एवं गायक कमलजीत नीलों पाठकों के रूबरू
पटियाला, 12 मई, 2026: पंजाब भाषा विभाग द्वारा आज मासिक पुस्तक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अप्रैल माह के दौरान पढ़ी गई पुस्तकों पर चर्चा की। इस बैठक में प्रसिद्ध बाल साहित्यकार कमलजीत नीलों विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विभाग के निदेशक श्री जसवंत सिंह ज़फर ने श्री नीलों का स्वागत करते हुए कहा कि बाल साहित्य हर समाज की नई पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ने का पहला कदम है। पंजाब की कई पीढ़ियों को पुस्तक संस्कृति से जोड़ने में कमलजीत नीलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने न केवल अपनी रचनाओं को पुस्तकों के रूप में बच्चों तक पहुँचाया, बल्कि गायन के माध्यम से भी बच्चों का स्वस्थ मनोरंजन किया है। उन्होंने कहा कि समय की आवश्यकता है कि बच्चों को अधिक से अधिक बाल साहित्य उपलब्ध कराया जाए।
श्री कमलजीत नीलों ने अपने साहित्यिक सफर की शुरुआत के बारे में बताया कि उनके पिता स्वर्गीय कुलवंत नीलों, जो स्वयं एक शायर थे, ने उन्हें साहित्य से जोड़ा। वे अपने पिता के साथ बचपन से ही बाल सभाओं में गाने लगे। साहित्य पढ़ने से ही उनमें लेखन की रुचि विकसित हुई और फिर उन्होंने अपनी बाल रचनाओं को बच्चों की आवाज़ में गाना शुरू किया, जिसे सभी वर्गों के श्रोताओं ने सराहा।
उन्होंने कहा कि बच्चा बहुत शक्तिशाली होता है और उसके जन्म के साथ ही अनेक नए रिश्ते बनते हैं। इसलिए इन रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए बच्चों को शब्द ज्ञान देना अत्यंत आवश्यक है।
श्री नीलों ने अपने विभिन्न गीतों की सार्थकता बताते हुए उन्हें संगीत की धुनों के साथ प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने अपने प्रसिद्ध गीत ‘माणो बिल्ली आई ऐ..’, ‘मन्न ले दुआवां रब्बा..’, ‘खेलां खिलावे दादी..’, ‘बचपन की तितलियाँ’, ‘पुत्र परदेसीया कब पाएगा फेरा’, ‘नू्ह सास का मुकाबला’ और ‘चंगा प्यारियो आपां फेर मिलांगे’ के माध्यम से कार्यक्रम को संगीतमय बना दिया।
‘बिल्ली बोली म्याऊँ’ गीत के माध्यम से उन्होंने भाषा विभाग की गतिविधियों, योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी दी।
विभाग की ओर से पुस्तकों के सेट एवं विभागीय शॉल देकर कमलजीत नीलों को सम्मानित किया गया। मंच संचालन शोध अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने किया। अंत में शोध अधिकारी डॉ. संतोष सिंह ने काव्यात्मक अंदाज में श्री नीलों का धन्यवाद किया।
इस अवसर पर डिप्टी डायरेक्टर आलोक चावला, सहायक डायरेक्टर अमरिंदर सिंह, तेजिंदर सिंह गिल, सुरिंदर कौर, जसप्रीत कौर, प्रो. तरलोचन कौर, साहित्यकार संत सिंह सोहल, कुलवंत नारिके, गुरचरण सिंह चन्न पटियालवी, बचन सिंह गुरम, अनिल कुमार गोयल, हेम राज तथा बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
चित्र विवरण:
भाषा विभाग पंजाब के निदेशक श्री जसवंत सिंह ज़फर द्वारा श्री कमलजीत नीलों को सम्मानित करते हुए।






