पटियाला, 6 मई 2026 : पंजाब सरकार के संरक्षण में भाषा विभाग पंजाब द्वारा आज प्रसिद्ध पंजाबी कहानीकार कुलवंत सिंह विरक की स्मृति को समर्पित एक कहानी समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान समकालीन प्रसिद्ध कहानीकार अजमेर सिद्धू और सांवल धामी की कहानियों का पाठ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाबी विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुरजीत सिंह ने की।
कार्यक्रम के पहले सत्र में भाषा विभाग के निदेशक जसवंत सिंह ज़फर ने उपस्थित कहानीकारों, विद्वानों और अतिथियों का स्वागत किया तथा कुलवंत सिंह विरक की लघु कहानी लेखन शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विरक पंजाबी समाज के अवचेतन को पकड़ने वाले लेखक थे और लघु कहानी के विकास में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
कहानीकार अजमेर सिद्धू ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर आधारित अपनी कहानी ‘बर्फ दी बुलबुल’ प्रस्तुत की, जिसे काफी सराहना मिली। वहीं सांवल धामी ने पंजाब विभाजन से जुड़ी अपनी कहानी ‘गराईं’ का पाठ किया, जिसमें पंजाबी समाज की विभिन्न परतों और उसके व्यापक मानवीय दृष्टिकोण को उजागर किया गया।
अध्यक्षीय भाषण में डॉ. सुरजीत सिंह ने कहा कि पंजाबी लघु कहानी के क्षेत्र में कुलवंत सिंह विरक का स्थान मील का पत्थर है। उनकी रचनाओं की विशेषताएं आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बनीं। उन्होंने दोनों कहानीकारों की रचनात्मकता की भी सराहना की।
इस अवसर पर विभाग की ओर से डॉ. सुरजीत सिंह, अजमेर सिद्धू और सांवल धामी को शॉल और पुस्तकों के सेट भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सहायक निदेशक तेजिंदर सिंह गिल ने सभी का धन्यवाद किया।
समारोह में भुपिंद्रा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. पुष्पिंदर सिंह गिल, पूर्व आईआरएस हरजीत सिंह सोही, पंजाबी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर बलदेव सिंह ढालीवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मंच संचालन शोध अधिकारी डॉ. मनजिंदर सिंह ने किया।
तस्वीर: भाषा विभाग पंजाब द्वारा आयोजित कुलवंत सिंह विरक स्मृति कहानी समारोह के दौरान निदेशक जसवंत सिंह जफर अतिथियों को सम्मानित करते हुए।






