पटियाला, 28 अप्रैल, 2026 : कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब के सहायक गन्ना विकास अधिकारी, पटियाला और नाहर शुगर मिल, अमलोह के फील्ड स्टाफ द्वारा 24 अप्रैल को नाहर शुगर मिल, अमलोह के गेट एरिया के गांवों में संतुलित उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया। इस अभियान की शुरुआत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब, चंडीगढ़ के प्रबंधकीय सचिव अर्शदीप सिंह थिंद के निर्देशों तथा केन कमिश्नर, पंजाब, एस.ए.एस. नगर के डॉ. अमरीक सिंह के मार्गदर्शन में की गई।
इस अभियान के तहत 28 गांवों में किसान प्रशिक्षण शिविर और नुक्कड़ बैठकों का आयोजन किया गया, जहां गन्ना किसानों को विशेष रूप से यूरिया खाद का उपयोग सिफारिशों के अनुसार करने के लिए जागरूक किया गया।
सहायक गन्ना विकास अधिकारी, पटियाला डॉ. गौरव अरोड़ा ने बताया कि गन्ने की फसल लंबी अवधि की होती है, इसलिए इसे अन्य फसलों की तुलना में अधिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिक उर्वरकों के उपयोग से कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि अधिक यूरिया के उपयोग से फसल गिरने, कीटों के हमले और शुगर रिकवरी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई बार सितंबर महीने में भी यूरिया डाला जाता है, जो एक गलत प्रथा है, क्योंकि इससे नई कलमें निकलती हैं जो गन्ने में परिवर्तित नहीं होतीं और पहले से बने गन्नों का वजन कम कर देती हैं।
विशेषज्ञों ने सिफारिश की कि पतझड़ मौसम की फसल के लिए 195 किलोग्राम यूरिया तीन समान किस्तों में डाला जाए—पहली बुवाई के समय, दूसरी मार्च के अंत में और तीसरी अप्रैल के अंत में। वहीं, बसंत मौसम की फसल के लिए भी यूरिया की मात्रा और समय निर्धारित किया गया है।
कृषि विकास अधिकारी (गन्ना), पटियाला डॉ. परमजीत कौर ने बताया कि फॉस्फोरस और पोटाश उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही करना चाहिए। यदि फॉस्फोरस की कमी हो तो प्रति एकड़ 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट डालने की सिफारिश की जाती है।
उन्होंने किसानों को यह भी जानकारी दी कि अधिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और नाइट्रोजन भूजल में मिलकर पानी को प्रदूषित करता है।
किसानों से अपील की गई कि धान की पराली को जलाने के बजाय खेतों में ही संभाल कर रखें, ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे।
कृषि विभाग द्वारा यह जागरूकता अभियान आगे भी जारी रखा जाएगा।






