पटियाला, 22 अप्रैल 2026: जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्थक कदम उठाते हुए, पटियाला फाउंडेशन ने “पानी बचाओ: सोचो, काम करो, बचाओ” पहल के तहत अपनी चौथी कार्यशाला सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल (GSSS), मॉडल टाउन, पटियाला में सफलतापूर्वक आयोजित की। यह कार्यशाला भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समर्थन से पंजाब राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (PSCST) के सहयोग से आयोजित की गई।
यह कार्यशाला प्रोजेक्ट पृथ्वी (PRITHVI) का हिस्सा है, जो पटियाला फाउंडेशन की एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य युवाओं के बीच पर्यावरण जागरूकता, टिकाऊ प्रथाओं और जिम्मेदार जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है।
जागरूकता और व्यावहारिक शिक्षा
सत्र की शुरुआत छात्रों की जल उपयोग और संरक्षण के प्रति वर्तमान समझ का आकलन करने के साथ हुई। इसके बाद पटियाला फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ श्री रवि सिंह अहलूवालिया ने विशेष सत्र आयोजित किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण का भविष्य आज हमारे द्वारा लिए गए निर्णयों पर निर्भर करता है। उन्होंने छात्रों को सरल और जागरूक आदतें अपनाकर भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस महत्वपूर्ण संसाधन को बचाने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञों के विचार
- रुद्राक्ष सिसोदिया (राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ): उन्होंने साफ और सुरक्षित पानी के महत्व पर जानकारी साझा की। उन्होंने जल प्रदूषण, अत्यधिक खपत और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हुए छात्रों को संरक्षण प्रयासों में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
- श्रीमती नीशू गुप्ता: उन्होंने एक इंटरैक्टिव सत्र के माध्यम से दैनिक जीवन में पानी बचाने के व्यावहारिक तरीके बताए। छात्रों ने अपने माता-पिता के लिए संदेश लिखे और ‘वॉटर ट्री’ पर संकल्प नोट लगाए।
- श्रीमती नवदीप (इंटर्न, पंजाबी यूनिवर्सिटी): उन्होंने पानी से होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी दी और छात्रों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया।

सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर
सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6: स्वच्छ जल और स्वच्छता) के अनुरूप, इस पहल ने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया।
पटियाला फाउंडेशन की टीम ने GSSS मॉडल टाउन के स्टाफ, विशेष रूप से स. भगवंत सिंह (प्रभारी), श्रीमती सोनिया चावला (इको-क्लब समन्वयक) और श्रीमती दमनदीप कौर (साइंस मिस्ट्रेस) का उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यशाला का समापन छात्रों द्वारा पानी बचाने के छोटे-छोटे कार्यों को अपनाने और ‘परिवर्तन के दूत’ बनने के संकल्प के साथ हुआ।






