अनिल कुमार भारती की राष्ट्रीय गौ-शक्ति कार्ययोजना पर केंद्र सरकार ने शुरू की कार्रवाई
प्रधानमंत्री कार्यालय ने पत्र का संज्ञान लेकर भारत सरकार के विशेष विभाग सी ई ओ माईगोव. को सौंपी जिम्मेदारी।
सड़कों को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेज पहल।
पटियाला 05 अप्रैल, 2026: प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा तेज संज्ञान लिए जाने से देश की सड़कों को बेसहारा पशुओं से मुक्त करने और भारतीय गोधन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। पोल्यूशन फ्री इंडिया प्रोजेक्ट इंटेलेक्चुअल फोरम के संस्थापक, अंतरराष्ट्रीय लेखक एवं प्रख्यात शिक्षा शास्त्री श्री अनिल कुमार भारती द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को भेजे गए नए राष्ट्रीय गौ-शक्ति मॉडल पर केंद्र सरकार ने संज्ञान लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस योजना की गंभीरता को देखते हुए इसे जमीन पर उतारने के लिए भारत सरकार के विशेष विभाग सी ई ओ माईगोव को सौंप दिया है।
भावनाओं से ऊपर उठकर पूरी तरह वैज्ञानिक खाका तैयार करने वाले गौ सेवक अनिल कुमार भारती ने पूरी तरह तार्किक, आर्थिक और शत-प्रतिशत वैज्ञानिक खाका तैयार किया है, जिसे अभी विस्तार देकर एक बड़ी राष्ट्रीय पुस्तक का रूप दिया जा रहा है। शिक्षाशास्त्री भारती ने बताया कि यह कार्ययोजना कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को मजबूत करने वाला एक आत्मनिर्भर मॉडल है।
नूरमहल मॉडल और हरित ऊर्जा से आत्मनिर्भरता प्रदान करने वाली इस कार्ययोजना के मुख्य बिंदुओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसमें पंजाब के नूरमहल में चल रहे सफल और वैज्ञानिक गौशाला प्रबंधन को आधार बनाकर पूरे देश की गौशालाओं के आधुनिकीकरण का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, गऊ-सौर ऊर्जा कॉरिडोर के अंतर्गत गौशालाओं की छतों और खाली भूमि पर सोलर पैनल लगाकर उन्हें सौर ऊर्जा का केंद्र बनाया जाएगा, जिससे गौशालाएं बिजली बेचकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी।
पशु-आधार और गऊ-काष्ठ की नई पहल की इस व्यावहारिक
योजना में पशु-आधार यानी डिजिटल गौ-ट्रैकिंग का विशेष प्रबंध है, जिसके तहत आर एफ आई डी चिप और जी पी एस ट्रैकिंग के माध्यम से देश के प्रत्येक बेसहारा पशु को एक विशेष पहचान देने का प्रावधान है, जिससे उनकी अवैध तस्करी और उपेक्षा पर पूरी तरह रोक लगेगी। पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अंतिम संस्कार और अन्य पारंपरिक कामों में पेड़ों की लकड़ियों की जगह गाय के गोबर से बनी लकड़ियों यानी गऊ-काष्ठ का कम से कम आधा प्रयोग अनिवार्य करने का खाका खींचा गया है, जिससे देश के करोड़ों पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा।
ग्रामीण आर्थिकी और इससे जुड़ा हुआ राष्ट्रव्यापी तंत्र बनाने पर जोर देते हुए इस कार्ययोजना में यह भी सिफारिश की गई है कि
सभी गौशालाओं को शून्य लागत प्राकृतिक खेती के लिए जैविक खाद निर्माण का केंद्र बनाने और गोबर आधारित छोटे उद्योगों से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केंद्र सरकार के नेतृत्व में सभी राज्य सरकारों के काऊ सैस फंड, उद्योगपतियों के सी एस आर फंड और समाज की स्वयंसेवी संस्थाओं को एक ही मंच पर जोड़ने का व्यावहारिक सुझाव भी दिया गया है।
इस महत्वपूर्ण कार्ययोजना को एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन बनाने का संकल्प प्रदान करते हुए श्री भारती ने पूरा विश्वास जताया है कि जिस प्रकार देश में स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया जन-आंदोलन बने हैं, उसी प्रकार केंद्र सरकार के नेतृत्व में सभी राज्यों और समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से यह गौ-शक्ति मॉडल भी एक नए और समृद्ध भारत की नींव रखेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले इस सकारात्मक और तेज संज्ञान से पूरे देश के बुद्धिजीवियों और पर्यावरण प्रेमियों में भारी खुशी की लहर दौड़ गई है।
जारीकर्ता:
अनिल कुमार भारती,
गौसेवक, लेखक और शिक्षाशास्त्री
मोबाइल: 7973126853






