पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का माध्यम बना उत्सव
पटियाला: 4 अप्रैल, 2026 : पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पंजाबी विभाग और साहित्य सभा द्वारा आयोजित ’12वां पुस्तक मेला और साहित्य उत्सव-2026′ अपनी समृद्ध साहित्यिक रंगत बिखेरते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 30 मार्च से 3 अप्रैल, 2026 तक चले इस मेले ने न केवल पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ जुटाई, बल्कि पंजाबी मातृभाषा और पढ़ने-लिखने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने में एक नया अध्याय भी जोड़ा।
विदाई समारोह में विभाग की अध्यक्ष डॉ. राजिंदर कौर ‘पंजाबी’ ने उपस्थित गणमान्य हस्तियों का हार्दिक स्वागत किया। कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि पंजाबी विभाग द्वारा आयोजित इस साहित्य उत्सव ने बड़े स्तर पर पाठकों, लेखकों, विद्वानों और शैक्षणिक हस्तियों को एक साथ जोड़कर एक यादगार कार्य किया है। ऐसे उत्सव नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत और संस्कृति से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पर्यावरण और साहित्य के मेल पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार शरीर के लिए स्वच्छ वातावरण जरूरी है, उसी प्रकार मानवीय मन की आरोग्यता के लिए उच्च कोटि का साहित्य अनिवार्य है।
विदाई भाषण देते हुए शिरोमणि लेखक प्रिंसिपल सरवन सिंह ने कहा कि पिछले पांच दिनों में हुई गोष्ठियों, कवि दरबारों और पुस्तक चर्चाओं ने यह साबित कर दिया है कि पंजाबी पाठक आज भी अपनी मातृभाषा और उच्च स्तरीय साहित्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। विशेष अतिथि प्रोफेसर बलतेज सिंह मान ने इस आयोजन की तुलना अदब और पुस्तक-संसार के खूबसूरत संगम से की।
इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में दशकों तक योगदान देने के लिए तेलू राम कुहाड़ा, बी.एस. रतन, प्रो. अछरू सिंह और डॉ. प्रभशरण कौर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। डीन रिसर्च डॉ. रितु बहल ने सभी का धन्यवाद किया। मंच संचालन डॉ. मोनिका सेतिया द्वारा बखूबी निभाया गया।
प्रमुख सत्र और चर्चाएँ:
आज के विभिन्न सत्रों में ‘पंजाबी गल्प (Fiction) में पंजाबी व्यक्ति के निर्माण का सवाल’ विषय पर चर्चा हुई। दिवंगत कथाकार डॉ. बलजीत कौर बल्ली की स्मृति को समर्पित बैठक में बलदेव सिंह सड़कनामा ने पात्रों के चयन पर बात करते हुए कहा कि एक लेखक पात्रों की पहचान लोक-बोली, मुहावरों और कहावतों के माध्यम से करता है। प्रसिद्ध प्रवासी पंजाबी कथाकार जरनैल सिंह ने कहा कि विदेश में महिलाओं की स्थिति पंजाब से अलग है, इसलिए वहां पात्रों का चित्रण भी अलग होना स्वाभाविक है।
साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता कथाकार जिंदड़ का मानना था कि लेखक को कभी भी किसी विचारधारा के प्रति कट्टरता नहीं दिखानी चाहिए। कथाकार भगवंत रसूलपुरी ने विचारधारा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पात्रों की प्रस्तुति के पीछे लेखक का दृष्टिकोण मुख्य होता है। कथाकार जी.एस. नक्षदीप पंजकोहा ने बताया कि पश्चिमी देशों में बसने वाली अगली पीढ़ी अपनी जड़ों से कट रही है। इस सत्र का संचालन डॉ. गुरमुख सिंह ने किया।
एक अन्य सत्र ‘बाल साहित्य का संकट: गुणवत्ता या कमी?’ विषय पर आधारित था, जिसमें ‘बाल संदेश’ के संपादक हृदयपाल सिंह, डॉ. कुलबीर सिंह सूरी, डॉ. दर्शन सिंह आश्ट और मनमोहन सिंह दाऊँ ने बाल साहित्य की चुनौतियों पर चर्चा की। इस बैठक का संचालन ‘निक्कियां करूँबलां’ के संपादक बलजिंदर मान ने किया। इन महत्वपूर्ण सत्रों में शोधार्थियों, छात्रों और साहित्य प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
फोटो कैप्शन: पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल, साहित्यकारों और मेहमानों को सम्मानित करते हुए कुलपति डॉ. जगदीप सिंह। साथ में पंजाबी विभाग की अध्यक्ष डॉ. राजिंदर कौर पंजाबी, डॉ. रितु बहल आदि।