जालंधर, 24 फरवरी 2026: पूर्व मंत्री एवं राणा गुरजीत सिंह ने कसावा (टैपिओका) की खेती का प्रदर्शन कर इसे अधिक पानी लेने वाली धान की फसल का प्रभावी विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि यह फसल धान की तुलना में बहुत कम पानी में तैयार हो जाती है और किसान प्रति एकड़ गेहूं-धान के मुकाबले तीन से चार गुना अधिक आय कमा सकते हैं।
यह प्रदर्शन हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया के शाहकोट स्थित तीन एकड़ खेत में किया गया। इस अवसर पर भारतीय कृषि परिषद भुवनेश्वर के निदेशक डॉ. एम. नेदुंचेजियन तथा पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना के विशेषज्ञों ने परीक्षण को सफल बताया और किसानों को तकनीकी जानकारी दी।
राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि प्रारंभिक चरण में क्षेत्र के लगभग 10 किसान दो-दो एकड़ में कसावा की बुवाई करेंगे, जिसके लिए वे मुफ्त बीज उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि फसल तैयार होने पर वे पूरी उपज खरीदेंगे, जिसका उपयोग बायो-एथेनॉल उत्पादन में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कसावा एक सूखा-रोधी स्टार्चयुक्त जड़ फसल है, जिसका उपयोग पशु आहार, बायोफ्यूल उत्पादन और अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों में किया जाता है। डॉ. नेदुंचेजियन ने कहा कि इससे टैपिओका मोती (साबूदाना), चिप्स, ग्लूटेन-फ्री आटा और बायो-एथेनॉल तैयार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक एकड़ में लगभग तीन फीट की दूरी पर करीब 5,000 पौधे लगाए जा सकते हैं। प्रत्येक पौधा औसतन 5 किलोग्राम से अधिक स्टार्चयुक्त कंद देता है। इस तरह एक किसान एक एकड़ से लगभग 25,000 किलोग्राम उत्पादन कर करीब 3.75 लाख रुपये तक कमा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह फसल कीट और रोगों से काफी हद तक सुरक्षित रहती है।






