प्रधानमंत्री को पत्र लिख AI का नाम ‘कुशाग्र बुद्धिमत्ता’ (Acumen Intelligence) रखने और वैश्विक नियामक संस्था बनाने हेतु सिफारिश की।
पटियाला (पंजाब): 21 फरवरी, 2026: विख्यात अंतरराष्ट्रीय लेखक एवं शिक्षा शास्त्री अनिल कुमार भारती ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को एक पत्र लिखकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित उपयोग और इसके वैश्विक दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। अपने पत्र में श्री भारती ने AI के लिए एक नया और सकारात्मक नाम ‘कुशाग्र बुद्धिमत्ता’ (Acumen Intelligence) सुझाया है, जो तकनीक को मानवीय सूझ-बूझ और तीक्ष्णता के साथ जोड़ता है।
’कृत्रिम’ नहीं, ‘कुशाग्र’ हो पहचान
शिक्षा शास्त्री अनिल कुमार भारती का तर्क है कि ‘आर्टिफिशियल’ (कृत्रिम) शब्द मशीनी बनावट और नकारात्मकता का बोध कराता है। इसके स्थान पर ‘कुशाग्र बुद्धिमत्ता’ शब्द का प्रयोग इसे मानवीय विवेक का सहयोगी और सकारात्मक उपकरण बनाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि भारत वैश्विक मंचों पर इस गौरवशाली नामकरण का नेतृत्व करे।
सुरक्षा हेतु पाँच-सूत्रीय वैश्विक मांगें
पत्र के माध्यम से श्री भारती ने मानवता की रक्षा हेतु निम्नलिखित कड़े प्रावधानों की वकालत की है:
वैश्विक नियामक प्राधिकरण (Global AI Authority): जिस प्रकार परमाणु ऊर्जा के लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र है, उसी प्रकार AI के लिए भी एक ‘International AI Regulatory Authority’ का गठन हो।
दुरुपयोग पर कठोर दंड: ‘डीपफेक’ और ‘वॉयस क्लोनिंग’ जैसे अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समान और अत्यंत कठोर दंडात्मक कानूनों का प्रावधान किया जाए।
अनिवार्य वॉटरमार्किंग: प्रत्येक AI जनित सामग्री पर अनिवार्य डिजिटल हस्ताक्षर और वॉटरमार्क होना चाहिए ताकि सत्य और असत्य का अंतर स्पष्ट रहे।
नैतिक कोडिंग (Ethical Coding): AI के विकास के हर चरण में मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का समावेश अनिवार्य हो।
विवेक का सहायक: तकनीक को मानव विवेक का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहायक (Co-pilot) माना जाए।
’वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना का विस्तार
श्री भारती ने अपने पत्र में विश्वास जताया है कि प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व में भारत इस तकनीक को ‘विनाश’ के बजाय ‘विकास’ का माध्यम बनाने में विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकती।
अंत में, उन्होंने आशा व्यक्त की कि एक शिक्षा शास्त्री के इन सुझावों पर गौर करते हुए सरकार इसे वैश्विक नीति का हिस्सा बनाने की दिशा में पहल करेगी।
जारी कर्ता:
अनिल कुमार भारती
अंतरराष्ट्रीय लेखक एवं शिक्षा शास्त्री
पटियाला, पंजाब।
संपर्क: +91 7973126853
ईमेल: anilbharti1967@gmail.com






