सरी (कनाडा), 24 नवंबर 2025:
ब्रिटिश कोलंबिया सरकार ने सिख धर्म के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की अमर शहादत के 350वें प्रकाश वर्ष को आधिकारिक रूप से मनाने का एलान जारी किया है। यह घोषणा उस महान बलिदान को श्रद्धांजलि है, जो गुरु साहिब ने धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और निर्बलों की रक्षा के लिए दिया था—एक ऐसा इतिहासिक बलिदान जिसे विश्व इतिहास में अद्वितीय माना जाता है।
यह प्रख्यापन महाराजा किंग चार्ल्स तृतीय के नाम पर जारी किया गया, जिसमें ब्रिटिश कोलंबिया में सिख समुदाय के दशकों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक योगदान का भी विशेष सम्मान किया गया। शुरुआती 1900 के दशक से यहाँ बसे सिख प्रवासी समुदाय ने प्रांत की प्रगति, मूल्यों और बहुसांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करने में अहम भूमिका निभाई है। एलान में गुरु तेग बहादुर जी को “धार्मिक स्वतंत्रता के रक्षक, बलिदान और साहस के प्रतीक तथा सांस्कृतिक सद्भाव के दूत” के रूप में वर्णित किया गया।
सरी में आयोजित सरकारी कार्यक्रम
इस अवसर पर आधिकारिक समागम सरी के सिंह सभा गुरुद्वारा साहिब में आयोजित किया गया, जहां ब्रिटिश कोलंबिया की अटॉर्नी जनरल निकी शर्मा ने प्रख्यापन को संगत के सामने पढ़कर सुनाया और इसकी फ़्रेम की हुई प्रति गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को भेंट की। संगत की ओर से उनका विशेष स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में पोस्ट-सेकंडरी एजुकेशन एंड फ़्यूचर स्किल्स मंत्री जैसी सुन्नड़ तथा संसदीय सचिव अमना शाह भी उपस्थित रहीं। दोनों ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत मानवाधिकारों की रक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता की कद्र और समाज में न्याय तथा भाईचारे को मजबूत करने की प्रेरणा देती है। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने दोनों मंत्रीगण को सम्मान-पत्र भेंट किए।
विद्वानों ने रखी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि
प्रसिद्ध सिख विद्वान ज्ञान सिंह संधू ने गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु साहिब का बलिदान केवल सिख धर्म के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की स्वतंत्रता और न्याय के लिए था। यह दिन हर व्यक्ति को शांति, सहिष्णुता और निडरता की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।
यह सूबाई घोषणा ब्रिटिश कोलंबिया की विविधता, समावेश और सभी धर्मों के प्रति सम्मान की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। यह दिवस केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि आधुनिक दुनिया के लिए न्याय, मानवाधिकार और स्वतंत्रता के सम्मान का एक नैतिक संदेश भी है।






