चंडीगढ़, 29 जनवरी 2026: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जुगाड़ रिक्शा, गाड़े, घोड़ा-टांगा और हाथ-गाड़ियों जैसे अवैध रूप से संशोधित वाहनों को चलाने की अनुमति मांगने वाली यूनियन को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने पंजाब रेहड़ा, घोड़ा-टांगा, हाथ-गाड़ी, रिक्शा वर्कर्स यूनियन द्वारा दायर जनहित याचिका को सख्त टिप्पणियों के साथ खारिज कर दिया।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब मोटर वाहन अधिनियम ऐसे संशोधित वाहनों के संचालन की अनुमति नहीं देता, तो उन्हें सड़कों पर चलाने की इजाजत कैसे दी जा सकती है। बेंच ने याचिकाकर्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे या तो अपनी याचिका वापस लें, अन्यथा भारी जुर्माने के साथ इसे खारिज कर दिया जाएगा।
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद यूनियन ने अपनी याचिका वापस ले ली, जिसके बाद अदालत ने इसे औपचारिक रूप से खारिज कर दिया।
याचिका में यूनियन ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट के एक अन्य आदेश के बाद सरकार और पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। यूनियन का कहना था कि करीब दो लाख लोग इन संशोधित वाहनों के जरिए अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं और यदि इन्हें सड़कों से हटाया गया तो उन्हें भुखमरी का सामना करना पड़ेगा।
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब सरकार युवाओं को रोजगार देने में विफल रही है, जिसके चलते बढ़ती बेरोजगारी के कारण बी.टेक और स्नातक जैसे पढ़े-लिखे युवा भी अस्थायी वाहनों और रिक्शा चलाने को मजबूर हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई से लगातार परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया था।
याचिका में इन लोगों के लिए राहत, पुनर्वास और मुआवजे की मांग की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि अवैध रूप से चलाए जा रहे वाहनों को किसी भी सूरत में संरक्षण नहीं दिया जा सकता।






