नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026: भारतीय सेना ने सिख सैनिकों की घटती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है और देश के युवाओं, विशेषकर पंजाब के नौजवानों से सिख रेजीमेंट में शामिल होकर अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने की अपील की है। एक आधिकारिक बयान में सेना ने सिख रेजीमेंट को भारतीय सेना की “सबसे प्रतिष्ठित और विशिष्ट रेजीमेंटों में से एक” बताया।
सेना ने कहा कि इस गौरवशाली रेजीमेंट में सेवा करना अपने आप में एक बड़ा सम्मान है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने पहले भी पंजाब से सेना में भर्ती कम होने पर चिंता व्यक्त की है। अप्रैल 2025 में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद इस मुद्दे को स्वीकार किया था और युवाओं के विदेश पलायन तथा नशे की प्रवृत्ति को इसका प्रमुख कारण बताया था।
भारतीय सेना ने अपने बयान में सिख रेजीमेंट की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जड़ों को रेखांकित करते हुए कहा कि इसका मार्शल दर्शन छठे सिख गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब से जुड़ा है, जिसे दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने और अधिक सुदृढ़ किया। साहस, अनुशासन और बलिदान के सिद्धांत पीढ़ियों से सिख सैनिकों को प्रेरित करते रहे हैं।
बयान में यह भी बताया गया कि सिख रेजीमेंट के अनेक सैनिक जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) और कमीशंड अधिकारी के पदों तक पहुंचे हैं और नेतृत्व व पेशेवर उत्कृष्टता की मिसाल कायम की है। सेना ने यह भी कहा कि आज के दौर में तकनीक, खेल और विशेष क्षेत्रों में सिख युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।
भारतीय सेना ने जोर देकर कहा कि वर्दी में सेवा न केवल पेशेवर विकास का अवसर देती है, बल्कि परिवार की सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित करती है। सेना ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आगे आएं और देश सेवा के इस गौरवशाली मार्ग को अपनाएं।






