नई दिल्ली, 19 दिसंबर 2025: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पंजाब सरकार की फार्महाउस नीति पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे इस नीति से लाभ उठाने वाले प्रभावशाली लोगों को बड़ा झटका लगा है। यह नीति पंजाब के कांडी क्षेत्र में डीलिस्टेड वन भूमि पर प्रति एकड़ तय क्षेत्र में निर्माण की अनुमति देती थी।
पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग ने इस संबंध में 20 नवंबर को अधिसूचना जारी की थी। माना जा रहा था कि इस फैसले से कई राजनेताओं और वरिष्ठ नौकरशाहों को लाभ मिलेगा, जिन्होंने इस क्षेत्र में फार्महाउस बनाए हैं या बनाने की योजना में थे।
इस अधिसूचना को 23 नवंबर को काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स ने एनजीटी में चुनौती दी थी। काउंसिल के अध्यक्ष कपिल अरोड़ा ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने इस नीति पर 4 फरवरी 2026 तक रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि यह अधिसूचना प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है।
याचिका में तर्क दिया गया कि राज्य सरकार ने क्षेत्र का पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) कराए बिना निर्माण की अनुमति दी, जबकि मौजूदा पर्यावरणीय नियमों के तहत यह अनिवार्य है।
शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित कांडी क्षेत्र पहले पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट, 1900 के तहत संरक्षित था। वर्ष 1995 में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद 2005 में आए ऐतिहासिक फैसले के तहत कुछ क्षेत्रों को सख्त शर्तों के साथ डीलिस्ट किया गया था। अदालत ने डीलिस्टेड इलाकों में केवल कृषि या स्थानीय निवासियों की आजीविका से जुड़े कार्यों की ही अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कांडी क्षेत्र में 56,050 हेक्टेयर भूमि को डीलिस्ट किया था, जबकि पंजाब सरकार ने 65,270 हेक्टेयर भूमि को डीलिस्ट करने की मांग की थी। वर्ष 2010 में पंजाब के मुख्य सचिव ने डीलिस्टेड भूमि को वन विभाग के दायरे से बाहर किया, लेकिन 2015 में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि इस भूमि का उपयोग व्यावसायिक या गैर-कृषि कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता।
इन प्रतिबंधों के बावजूद क्षेत्र में फार्महाउस निर्माण शुरू हो गया था और 2022 में एक फार्महाउस मालिक के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। नवंबर 2025 में पंजाब सरकार द्वारा सीमित निर्माण की अनुमति देने के फैसले पर अब एनजीटी की अंतरिम रोक लग गई है।






