पटियाला, 17 जून, 2026: पंजाब भर के समूह सरकारी सहायता प्राप्त (एडिड) स्कूलों की दिनों-दिन बदतर होती जा रही तरसयोग्य हालत और पिछले कई-कई महीनों से अपनी जायज़ तनख्वाहों को तरस रहे हज़ारों अध्यापकों और गैर-अध्यापन कर्मचारियों की गंभीर समस्याओं पर गहरी चिंता प्रकट की गई है। इन सारी उलझी हुई समस्याओं का एकमात्र स्थायी और सार्थक हल पेश करते हुए प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय लेखक और शिक्षा शास्त्री अनिल कुमार भारती ने एक बहुत ही संजीदा और महत्वपूर्ण प्रेस बयान जारी किया है। उन्होंने बेबाकी से कहा कि वर्तमान समय में पंजाब के एडिड स्कूलों में कार्यशील महज़ 1300 के करीब बचे हुए अध्यापकों और अन्य स्टाफ के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए, उनका सरकारी स्कूलों में बिना किसी देरी के पूर्ण मर्जर (विलय) करना ही एकमात्र व्यावहारिक और न्यायपूर्ण हल रह गया है।
इस संबंधी विवरणपूर्वक ऐतिहासिक आंकड़े साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब पूरे राज्य के 484 एडिड स्कूलों में लगभग 10 हजार के करीब उच्च योग्यता प्राप्त कर्मचारी पूरी तनदेही से अपनी सेवाएं निभा रहे थे और सूबे के शिक्षा ढांचे में बड़ा योगदान पा रहे थे। पर सरकारों की गलत नीतियों और लगातार हुई अनदेखी के कारण आज यह बड़ी संख्या तेजी से घटकर सिर्फ 1300 के आस-पास ही सिमट कर रह गई है, जो कि बेहद चिंताजनक विषय है।
श्री भारती के विश्लेषण अनुसार, आज इन एडिड स्कूल कर्मचारियों के साथ सरेआम भेदभाव हो रहा है। उन्हें सरकारी स्कूलों के दूसरे कर्मचारियों की तरह न तो समय पर मासिक तनख्वाहें मिल रही हैं और न ही नियमों अनुसार बनती पदोन्नति, ए.सी.पी. (एश्योर्ड करियर पर प्रोग्रेशन) लाभ, मेडिकल भत्ते और अन्य ज़रूरी वित्तीय अधिकार प्रदान किए जा रहे हैं। हालात इस कदर नाज़ुक बन चुके हैं कि कई स्कूलों के निराश कर्मचारियों को अपनी हक की तनख्वाह लेने के लिए भी सालों-साल इंतज़ार करना पड़ता है और अंत में मजबूर होकर अपने बुनियादी हकों की प्राप्ति के लिए महंगी अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। दूसरी तरफ, इन सहायता प्राप्त स्कूलों में स्टाफ की हो रही भारी और निरंतर कमी के कारण वहां पढ़ने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों की पढ़ाई का भी अपूरणीय नुकसान हो रहा है, जिससे उनका भविष्य धुंधला होता जा रहा है।
शिक्षा शास्त्री ने सरकार को सुझाव देते हुए स्पष्ट किया कि यदि इन कर्मचारियों का सरकारी स्कूलों में तुरंत विलीनीकरण कर दिया जाता है, तो इससे पंजाब के शिक्षा विभाग को बिना किसी अतिरिक्त मशक्कत के एक बहुत ही अनुभवी, मेहनती और विशेषज्ञ अध्यापक वर्ग की सेवाएं सीधे तौर पर हासिल हो जाएंगी। इस कदम से न सिर्फ सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी दूर होगी, बल्कि शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता में भी बहुत बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
उन्होंने वित्तीय पक्ष को उजागर करते हुए एक बहुत ही अहम तथ्य पेश किया कि वर्तमान समय में भी इन कर्मचारियों की तनख्वाहों का 95 प्रतिशत (95%) मोटा हिस्सा पंजाब सरकार द्वारा ही ग्रांट के रूप में पहले से अदा किया जा रहा है। इसलिए विलीनीकरण से सरकार पर कोई बहुत बड़ा नया वित्तीय बोझ नहीं पड़ने वाला। इसके अलावा, इन स्कूलों के कर्मचारियों के पी.एफ. (प्रोविडेंट फंड) खातों में जमा पड़ी लगभग 200 करोड़ रुपये की बड़ी राशि विलीनीकरण के बाद सीधी सरकारी खजाने में स्थानांतरित हो जाएगी, जिससे सूबे के सरकारी खजाने को एक बहुत बड़ी मजबूती और आर्थिक सहारा मिलेगा।
बयान के अंत में, अंतर्राष्ट्रीय लेखक अनिल कुमार भारती ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से पुरज़ोर मांग की कि पड़ोसी राज्यों जैसे कि हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की सरकारों की तर्ज पर, जिन्होंने पहले ही अपने एडिड स्टाफ को सरकारी स्कूल प्रणाली में शामिल करके मिसाल पेश की है, पंजाब के एडिड स्कूल स्टाफ का भी पूर्ण पेंशन हकों और पे-प्रोटेक्शन (तनख्वाह सुरक्षा) की पूरी गारंटी के साथ सरकारी स्कूलों में तुरंत प्रभाव से विलीनीकरण किया जाए, ताकि इन कर्मचारियों के मानसिक तनाव को खत्म करके उन्हें इंसाफ दिया जा सके।
जारीकर्ता:
अनिल कुमार भारती,
अंतर्राष्ट्रीय लेखक और शिक्षा शास्त्री
मोबाइल: 7973126853






