धूरी, 16 जून, 2026 : रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग तथा जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के दिशा-निर्देशों के तहत फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गांव बुग्गरा में धान और बासमती की पौध पर लगाए जाने वाले जैव उर्वरक टीकों, मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन तथा धान में फास्फोरस उर्वरक के अनावश्यक प्रयोग से बचने संबंधी एक गांव स्तरीय किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में लगभग 30 किसानों ने भाग लिया।
शिविर का नेतृत्व करते हुए वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उर्वरकों के संतुलित प्रयोग से न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि फसल उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। उन्होंने मौके पर ही मिट्टी के नमूने लेने की सही विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा स्वयं नमूना लेकर किसानों को व्यावहारिक रूप से समझाया।
डॉ. गर्ग ने किसानों को धान और बासमती में डीएपी उर्वरक के अनावश्यक उपयोग से बचने तथा यूरिया का भी संयमित प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने विशेष रूप से कद्दू (पडलिंग) करने से पहले यूरिया के 2-3 बैग डालने की प्रथा से बचने का आग्रह किया। उन्होंने धान में जिंक की कमी को दूर करने के लिए केवल अनुशंसित मात्रा में ही जिंक का उपयोग करने की सलाह दी।
जैविक उर्वरकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. गर्ग ने कहा कि धान की पौध पर लगाया जाने वाला एजोस्पाइरिलम टीका फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की जैविक उर्वरता और स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने धान की नर्सरी तैयार करने के लिए अनुशंसित उर्वरकों तथा अन्य प्रबंधन संबंधी सिफारिशों की भी विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने धान की नर्सरी में बौने पौधों के रोग की पहचान और रोकथाम संबंधी उपायों के बारे में भी बताया तथा किसानों को नर्सरी की नियमित निगरानी करने के लिए प्रेरित किया।
शिविर की सफलता में सरदार प्रीतपाल सिंह, सरदार हरदीप सिंह, सरदार दविंदर सिंह (सरपंच), सरदार बलकार सिंह तथा अन्य किसानों का विशेष योगदान रहा। अंत में कृषि साहित्य आदि की बिक्री भी की गई।
शिविर के दौरान किसानों द्वारा पूछे गए विभिन्न कृषि संबंधी प्रश्नों के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से उत्तर दिए गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. गर्ग ने सरदार प्रीतपाल सिंह के सीधे बुवाई किए गए बासमती के खेतों का भी निरीक्षण किया।






