पंजाबी बाल नाटक और बाल रंगमंच के विकास के लिए संसाधन जुटाने की जरूरत
पटियाला, 22 अप्रैल,2026 : हाल ही में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला में सुप्रसिद्ध पंजाबी बाल साहित्यकार डॉ. दर्शन सिंह ‘आशट’ की साहित्यशिला प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित दो नई बाल नाटक पुस्तकों— ‘तुम बच्चे कब बनोगे? और अन्य बाल नाटक’ तथा ‘चुगलखोर और अन्य बाल नाटक’ का लोकार्पण किया गया।
पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह की इस धारणा के मद्देनजर कि नई पीढ़ी को उसकी मातृभाषा और साहित्य से जोड़ना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है, पंजाब के प्रसिद्ध बाल साहित्यकारों द्वारा इन पुस्तकों का विमोचन किया गया।
प्रीतनगर (अमृतसर) से आए बाल पत्रिका ‘बाल संदेश’ के संपादक हृदयपाल सिंह ने कहा कि बाल साहित्य में बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण नाटकों की शुरू से ही कमी रही है और यह प्रयास उस दिशा में एक सकारात्मक कदम है। डॉ. कुलबीर सिंह सूरी ने कहा कि बाल साहित्य की सभी विधाओं ने पंजाबी बाल साहित्य को समृद्ध किया है और पंजाब में बाल रंगमंच की एक नई लहर शुरू होनी चाहिए।
माहिलपुर से आए बाल पत्रिका ‘नक्कियां करूंम्बलां’ के संपादक बलजिंदर मान ने कहा कि बाल साहित्य ही आगे चलकर वयस्क साहित्य के लिए मार्गदर्शक बनता है और बच्चों के मन में नैतिक मूल्यों का विकास करता है। मोहाली से आए मनमोहन सिंह दाऊं ने कहा कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया की तुलना में बाल साहित्य अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनकी मानसिकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करता।
डॉ. दर्शन सिंह ‘आशट’ ने कहा कि उन्होंने पंजाबी में बाल नाटकों की कमी को गहराई से महसूस किया है, खासकर गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चों के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले गुणवत्तापूर्ण नाटकों की कमी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन पुस्तकों के माध्यम से स्कूलों में बाल नाटकों के मंचन की कमी दूर होगी।
इस अवसर पर प्रसिद्ध बाल पत्रिका ‘नक्कियां करूंम्बलां’ का नवीनतम अंक भी जारी किया गया, जिसने पहले भी कई बाल नाटक विशेषांक प्रकाशित किए हैं।
इस कार्यक्रम में पंजाबी विभाग की प्रमुख डॉ. राजवंत कौर पंजाबी, डॉ. राजविंदर सिंह, डॉ. गुरसेवक सिंह लंबी, डॉ. राजमोहिंदर कौर, तरसेम सहित कई रंगकर्मी भी उपस्थित थे।
फोटो कैप्शन: डॉ. दर्शन सिंह आशट की दो बाल नाटक पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए हृदयपाल सिंह, डॉ. कुलबीर सिंह सूरी, मनमोहन सिंह दाऊं और ‘नक्कियां करूंम्बलां’ के संपादक बलजिंदर मान सहित अन्य।






