पंथ के नाम पर राज करने वालों के इकलौते विधायक ने भी गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट के लिए सहमति नहीं दी – चीमा
‘पंथ के नाम पर बनी सरकारों के दौरान ही गुरु ग्रंथ साहिब की बार-बार बेअदबी हुई’
कहा, नकोदर बेअदबी कांड की जांच संबंधी एक्शन टेकन रिपोर्ट ही गायब कर दी गई
पटियाला, 20 अप्रैल, 2026 : पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट-2026 को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब कोई भी व्यक्ति श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने की सोच भी नहीं सकेगा। उन्होंने कहा कि नए कड़े कानून के अनुसार बेअदबी करने वाले को उम्रकैद तथा 25 लाख रुपये तक का जुर्माना किया जाएगा, इसलिए अब बेअदबी का दौर समाप्त हो गया है।
आज यहां महाराजा भूपिंदर सिंह पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में आयोजित एक समारोह के दौरान बोलते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब में पंथ के नाम पर सरकार बनाने वालों के इकलौते विधायक ने 13 अप्रैल को विधानसभा से अनुपस्थित रहकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट को अपनी सहमति भी नहीं दी, जिस पर लोगों को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिस पार्टी ने पंथ के नाम पर पंजाब में शासन किया, गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं भी उसी के शासनकाल में हुईं।
मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने 1986 में पंथ के नाम पर बनी सरकार के समय गुरु अर्जन देव जी गुरुद्वारा साहिब, नकोदर में हुई बेअदबी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय गुरु ग्रंथ साहिब के 5 स्वरूपों की बेअदबी हुई थी और न्याय की मांग के लिए एकत्रित लोगों पर गोली चलाई गई, जिसमें चार नौजवानों की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस गुरनाम सिंह आयोग की एक्शन टेकन रिपोर्ट ही गायब कर दी गई।
हरपाल सिंह चीमा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि उसी पार्टी ने इस बेअदबी के समय तैनात अधिकारियों को टिकट देकर नवाजा और फिर 2015 में भी नकोदर की तर्ज पर बरगाड़ी और बहिबल कलां में बेअदबी और गोलीकांड हुए, लेकिन कोई न्याय नहीं मिला।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह संतोष की बात है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के प्रयासों से उस गोलीकांड और बेअदबी मामले का चालान अदालत में पेश किया गया और उस समय के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और डीजीपी रहे व्यक्तियों को अपनी जमानत करवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि बेअदबी के आरोपों के चलते ही श्री अकाल तख्त द्वारा दिया गया ‘फखर-ए-कौम’ सम्मान भी उनसे वापस ले लिया गया था।
इस मौके पर पंजाब एग्रो के चेयरमैन बलजिंदर सिंह ढिल्लों, जिला योजना समिति के चेयरमैन तेजिंदर मेहता, इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन हरपाल सिंह विरक, अमरीक सिंह बांगड़, अमित डाबी, कर्नल जे.वी. और जसवीर सिंह गांधी भी उपस्थित थे।






