प्रसाद पाने के लिए घंटों प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालु
श्री अमृतसर साहिब , 22 मार्च 2026: मानवता के आध्यात्मिक केंद्र श्री हरिमंदर साहिब (स्वर्ण मंदिर) के परिक्रमा परिसर में स्थित ऐतिहासिक बेरियों पर इस वर्ष भी भरपूर मात्रा में फल (बेर) आए हैं। इन बेरियों पर लगे फल न केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और आकर्षण का केंद्र भी बने हुए हैं।
श्री दरबार साहिब की परिक्रमा में स्थित प्राचीन ‘दुखभंजनी बेरी’, ‘बेर बाबा बुड्ढा जी’ और ‘लाची बेरी’ का सिख इतिहास में विशेष महत्व है। इस साल इन तीनों ऐतिहासिक वृक्षों पर भारी संख्या में बेर लगे हैं। सिख परंपराओं और मर्यादा के अनुसार, इन पवित्र वृक्षों से बेर तोड़ना सख्त वर्जित है। यही कारण है कि श्रद्धालु घंटों तक इन बेरियों के नीचे बैठकर इस प्रतीक्षा में रहते हैं कि कब कोई बेर स्वयं टूटकर धरती पर गिरे और वे उसे गुरु घर के ‘प्रसाद’ के रूप में ग्रहण कर सकें।
श्रद्धा और धैर्य की अनूठी मिसाल
परिक्रमा में बैठा हर श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन नजर आता है। जैसे ही कोई बेर टहनी से टूटकर नीचे गिरता है, संगत उसे बड़े अदब से उठाकर माथे से लगाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि दुखभंजनी बेरी से मिलने वाला यह फल केवल एक फल नहीं, बल्कि गुरु साहिब का आशीर्वाद है। गौरतलब है कि दुखभंजनी बेरी का इतिहास बीबी रजनी जी के उस प्रसंग से जुड़ा है, जहाँ उनके पति का रोग दूर हुआ था।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और विशेषज्ञों द्वारा इन ऐतिहासिक वृक्षों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं, ताकि इनकी आयु लंबी बनी रहे। परिक्रमा का यह दृश्य आस्था और धैर्य की एक अनूठी मिसाल पेश करता है, जहाँ भक्त सांसारिक चिंताओं को भूलकर बस एक रूहानी सौगात की प्रतीक्षा में लीन रहते हैं।






