पटियाला, 13 नवंबर: डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला मजिस्ट्रेट डॉ. प्रीति यादव ने आज आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार लाने के लिए बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान विभिन्न अदालतों में चल रहे फौजदारी मामलों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों, पॉक्सो एक्ट, एस.सी./एस.टी. मामलों, और अदालतों में चालान समय पर पेश करने से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई।
डॉ. प्रीति यादव ने इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों और सरकारी वकीलों को निर्देश दिए कि वे ट्रायल के दौरान जेलों में बंद आरोपियों को अदालत के आदेशों के अनुसार समय पर पेश करें और मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एन.डी.पी.एस. एक्ट (NDPS Act) के तहत दर्ज मामलों की समयबद्ध और तेज़ पैरवी की जाए। जहां से नशा बरामद हुआ है, वहां की संपत्ति या वाहन की मालिकाना हक़ साबित करने वाले गवाहों को भी तुरंत पेश किया जाए।
जिला मजिस्ट्रेट ने आगे निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति के पीड़ितों को न्याय दिलाने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। पुलिस चालानों की जांच (scrutiny) समय पर हो और मामलों के ट्रायल के दौरान केमिकल एग्जामिनर, विसरा और मेडिकल रिपोर्टें भी समय पर अदालतों में पेश की जाएं ताकि सुनवाई में देरी न हो।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि अदालतों में चालान निर्धारित समय से कम से कम 15 दिन पहले पेश किया जाए, क्योंकि कई बार गंभीर अपराधों और एन.डी.पी.एस. मामलों में चालान देर से दाखिल होने पर आरोपी लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा, अदालतों द्वारा जारी समन की तामील और पुलिस गवाहों की पेशी के दिन भी सभी अधिकारी अदालत में उपस्थित रहें।
डॉ. यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों द्वारा जारी निर्देशों की सख्ती से पालन सुनिश्चित की जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि नशा तस्करों और अन्य गंभीर अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाने के लिए चालान पेश करने और आगे की कार्रवाई में कोई देरी न की जाए।
बैठक में जिला अटॉर्नी (लीगल) देविंदर गोयल, जिला अटॉर्नी (प्रशासन) केसरी सिंह, एस.पी. स्वर्णजीत कौर, डी.एस.पी. डी. रजेश मल्होत्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।






