गुरदासपुर, 21 फरवरी 2026: गन्ने की बहार (बसंत) ऋतु की बुवाई के लिए फरवरी और मार्च का महीना बेहद उपयुक्त है। किसानों को अधिक पैदावार और आय बढ़ाने के लिए सिफारिश की गई किस्मों के रोगमुक्त बीज का चयन करना चाहिए।
सहकारी शुगर मिल गुरदासपुर के अधिकार क्षेत्र के गांव झेला आमदा में गन्ना उत्पादक गुरदेव सिंह के खेतों में किसानों से बातचीत करते हुए गन्ना आयुक्त पंजाब डॉ. अमरीक सिंह ने कहा कि गन्ने की फसल से अधिक लाभ लेने के लिए अंतरफसली प्रणाली अपनाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि गन्ने की बुवाई करते समय किसानों को पांच तकनीकी बातों का ध्यान रखना चाहिए समय पर बुवाई, चौड़ी कतार (फ्रेंच) विधि अपनाना, बुवाई से पहले बीज का उपचार, बीज के लिए गन्ने के ऊपरी एक-तिहाई हिस्से का उपयोग तथा अंतरफसली प्रणाली के तहत दलहनों की खेती शामिल है।
डॉ. सिंह ने कहा कि दलहनों की उत्पादन में कमी के कारण प्रति व्यक्ति दालों की खपत 70 ग्राम से घटकर 27 ग्राम रह गई है, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार प्रतिदिन 80 ग्राम की अनुशंसित खपत से काफी कम है।
उन्होंने बताया कि एक समय गुरदासपुर के रियाड़की क्षेत्र के माश (उड़द) प्रसिद्ध थे, लेकिन गेहूं-धान फसल चक्र अपनाने से यह फसल लगभग समाप्त हो गई है। पंजाब सरकार द्वारा दलहनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत गन्ने की फसल में अंतरफसल के रूप में माश की खेती कर क्षेत्रफल बढ़ाया जा सकता है।






