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चाँद के दीदार पर निर्भर रमज़ान की शुरुआत, 19 फरवरी से पहला रोज़ा होने की संभावना

लखनऊ/नई दिल्ली, 9 फरवरी 2026: इस्लामी कैलेंडर के सबसे पवित्र महीने रमज़ान को लेकर देशभर के मुस्लिम समुदाय में उत्सुकता बनी हुई है। लखनऊ की ऐतिहासिक टीले वाली मस्जिद के शाही इमाम मौलाना सैयद फज़लउल्लाह मन्नान रहिमानी ने रमज़ान की संभावित तारीखों को लेकर अहम जानकारी साझा की है।

शाही इमाम के अनुसार, हिजरी कैलेंडर के नौवें महीने रमज़ान की शुरुआत चाँद के दीदार पर निर्भर करती है, जो 29 या 30 शाबान को होती है। मौजूदा खगोलीय अनुमानों के मुताबिक भारत में रमज़ान का पहला रोज़ा 19 फरवरी 2026 को रखा जा सकता है।

रमज़ान के दौरान रोज़ेदार सूर्योदय से पहले ‘सेहरी’ करते हैं, जिसे बेहद बरकत वाला माना गया है, जबकि सूर्यास्त के बाद ‘इफ्तार’ के साथ रोज़ा खोला जाता है। इस पाक महीने में इबादत, संयम और आत्मसंयम का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इसी महीने पैग़ंबर मोहम्मद साहब पर पवित्र क़ुरान का अवतरण शुरू हुआ था।

मौलाना ने बताया कि रमज़ान की आख़िरी पाँच तांक़ रातें—21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं—ख़ासतौर पर इबादत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनमें शब-ए-क़द्र की रात का विशेष महत्व है। इसके अलावा महीने के आख़िरी शुक्रवार को ‘अलविदा जुमा’ की नमाज़ अदा की जाती है।

रमज़ान में ज़कात यानी दान देने की भी खास अहमियत है, ताकि ज़रूरतमंदों को सहायता मिल सके और वे भी खुशियों में शामिल हो सकें। रमज़ान के 29 या 30 रोज़े पूरे होने के बाद चाँद दिखने पर ईद-उल-फ़ितर मनाई जाती है, जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है। शाही इमाम के अनुसार वर्ष 2026 में ईद 20 या 21 मार्च को होने की संभावना है।

यह पवित्र महीना आपसी भाईचारे, त्याग और इंसानियत का संदेश देता है।

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