पटियाला, 28 अप्रैल, 2026 : युवा पीढ़ी में जल के जिम्मेदार उपयोग को प्रेरित करने के निरंतर प्रयास के तहत, पटियाला फाउंडेशन ने “Save Water: Think, Act, Preserve” पहल के अंतर्गत अपना छठा कार्यशाला सत्र ग्रीन वेल (अकादमी) हाई स्कूल, पटियाला, पंजाब में आयोजित किया। यह पहल पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (PSCST) के सहयोग से तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समर्थन से आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और व्यवहारिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करना था।
Patiala Foundation की प्रमुख परियोजना प्रोजेक्ट PRITHVI के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी विकसित करना तथा सतत जीवनशैली को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत एक पूर्व-आकलन गतिविधि से हुई, जिसमें छात्रों की जल उपयोग एवं संरक्षण के प्रति मौजूदा समझ का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद रवी सिंह अहलूवालिया
द्वारा तैयार किए गए सत्र आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और जिम्मेदार पर्यावरणीय व्यवहार को प्रोत्साहित करना था। उन्होंने इस विषय की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि जल संरक्षण का भविष्य आज हमारे निर्णयों पर निर्भर करता है और छात्रों से सरल एवं जिम्मेदार आदतें अपनाने का आग्रह किया। सत्र का समापन एक पोस्ट-आकलन के साथ हुआ, जिससे सीखने के परिणामों का मूल्यांकन किया गया।
अपने विचार साझा करते हुए रवी सिंह अहलूवालिया ने कहा, “जल जीवन का आधार है और इसका संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। वास्तविक परिवर्तन जागरूकता से शुरू होता है, लेकिन यह रोज़मर्रा के कार्यों से कायम रहता है। युवाओं को शिक्षित और जागरूक करके हम न केवल वर्तमान की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सतत भविष्य भी सुनिश्चित कर रहे हैं।”
कार्यशाला में स्वच्छ और सुरक्षित जल पर एक जानकारीपूर्ण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें जल संकट की बढ़ती समस्या और सार्वजनिक स्वास्थ्य, पारिस्थितिक संतुलन तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया। अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे प्रमुख मुद्दों को भी उजागर किया गया।
कार्यशाला में निशु गुप्ता ने एक रोचक एवं सहभागितापूर्ण सत्र का संचालन किया, जिसमें दैनिक जीवन में जल संरक्षण के व्यावहारिक उपाय बताए गए। गतिविधि-आधारित सीखने और सरल उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने छात्रों को जल बचाने की आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सत्र के दौरान छात्रों ने अपने माता-पिता को पोस्टकार्ड लिखकर घर पर जल संरक्षण अपनाने का संदेश दिया तथा “वॉटर ट्री” के लिए संदेश तैयार किए, जिससे जल बचाने की दैनिक प्रेरणा मिल सके।
कार्यक्रम में जल की बर्बादी, सतत उपभोग तथा संरक्षण के प्रभावी उपाय जैसे पुनः उपयोग, कुशल उपयोग और वर्षा जल संचयन पर भी चर्चा की गई, जिससे जागरूकता को व्यवहार में बदलने पर जोर दिया गया।
सत्र में पवन गोयल ने भी सहयोग दिया और छात्रों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
यह पहल Sustainable Development Goal 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) के अनुरूप है, जो पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करती है।
आयोजन समिति ने विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मंजू का विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने छात्रों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया। साथ ही, ग्रीन वेल (अकादमी) हाई स्कूल, पटियाला की प्रबंधन टीम—श्रीमती समरेज़ जहाँ, श्रीमती सुनीता मल्होत्रा, श्रीमती नीना गर्ग और श्रीमती हरदीप कौर—का भी सहयोग के लिए धन्यवाद किया गया।
यह पहल, जो पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के तत्वावधान में तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित की गई, पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिक बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं, और छात्रों को बदलाव के दूत बनने के लिए प्रेरित किया गया। पटियाला फाउंडेशन इस संदेश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर एक बूंद बचाना भविष्य को सुरक्षित बनाना है।
कार्यशाला सकारात्मक माहौल में समाप्त हुई, जिसमें छात्रों को जिम्मेदार आदतें अपनाने और जल संरक्षण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया—क्योंकि आज बचाई गई हर बूंद, कल के बेहतर भविष्य की गारंटी है।
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