पटियाला, 21 अप्रैल, 2026: पंजाब सरकार के संरक्षण में भाषा विभाग पंजाब द्वारा डायरेक्टर भाषाओं की देखरेख में आयोजित मासिक ‘पुस्तक बैठक’ के दौरान आज पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला की पूर्व प्रमुख एवं साहित्यकार डॉ. बलविंदर कौर बराड़ विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पिछले महीने पढ़ी गई पुस्तकों के अनुभव साझा किए, वहीं डॉ. बराड़ ने पुस्तकों के महत्व पर विस्तार से विचार रखे।
डॉ. बराड़ ने कहा कि किताबें पढ़ने वाला व्यक्ति कई जिंदगियां जीता है, जबकि पुस्तक संस्कृति से दूर व्यक्ति केवल एक जीवन जीकर ही दुनिया से चला जाता है। उन्होंने कहा कि एक सभ्य इंसान कैसे बनना है, यह हमें साहित्य ही सिखाता है। पहनावे की चीजें केवल दिखावा होती हैं, जबकि अक्षर ज्ञान व्यक्ति के व्यक्तित्व को भीतर और बाहर से निखारता है। उन्होंने कहा कि अक्षर ज्ञान व्यक्ति को समाज में रहने योग्य बनाता है और उसे बेहतर जीवनयापन के लिए सक्षम भी करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति अपनी मातृभाषा के माध्यम से अपने दुख-सुख, खुशी-गम और भावनाओं को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकता है। अन्य भाषाएं संचार और ज्ञान का माध्यम तो बन सकती हैं, लेकिन भावनाओं के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम नहीं बन पातीं। उन्होंने शब्दों को संजोने और उनके महत्व को समझने पर बल दिया।
धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान जसवंत सिंह ज़फ़र ने कहा कि विद्वानों के विचार हमेशा समाज को दिशा देते हैं। उनके अनुभव और जीवन के संघर्षों से निकला साहित्य ही समाज का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि डॉ. बराड़ के विचारों से स्पष्ट होता है कि कठिनाइयों में ही संभावनाएं जन्म लेती हैं, इसलिए हमें साहित्य और शब्दों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान शोध अधिकारी डॉ. मनजिंदर सिंह, रिपनजोत कौर बग्गा, राज कौर कमालपुर आदि ने डॉ. बराड़ से प्रश्न पूछकर कार्यक्रम को रोचक बनाया। विभाग की ओर से डॉ. बराड़ को शॉल और पुस्तकों के सेट देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर राज कौर बराड़ की पुस्तक ‘बचपन हुंदा बादशाह’ का भी लोकार्पण किया गया। मंच संचालन डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने किया। कार्यक्रम में सहायक निदेशिका सुखप्रीत कौर, तेजिंदर सिंह गिल, जसप्रीत कौर, सुरिंदर कौर सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
तस्वीर: डायरेक्टर भाषाएं जसवंत सिंह ज़फ़र, डॉ. बलविंदर कौर बराड़ को सम्मानित करते हुए।






