Sunday, June 7, 2026
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गूगल सर्च और एआई मानवीय संबंधों का विकल्प नहीं बन सकते – सतिंदरपाल सिंह सिद्धवां

पुस्तक बैठक में ‘किताब और कला’ विषय पर विशेष व्याख्यान

भाषा विभाग के कर्मचारियों ने श्री गुरु तेग बहादुर की जीवनी पर की चर्चा

पटियाला, 3 मार्च 2026: भाषा विभाग पंजाब के निदेशक स. जसवंत सिंह ज़फर के नेतृत्व में आयोजित मासिक पुस्तक बैठक के दौरान श्री गुरु तेग बहादुर जी की जीवनी पर आधारित प्रिं. सतबीर सिंह की पुस्तक ‘इति जिनि करी’ पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने विस्तृत चर्चा की।

इस अवसर पर प्रसिद्ध ढाडी/कविशर एवं कनाडा के मीडिया जगत की जानी-मानी शख्सियत सतिंदरपाल सिंह सिद्धवां ने ‘किताब और कला’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।

परंपराओं को सहेजने की जरूरत

स्वागत भाषण में स. जसवंत सिंह ज़फर ने कहा कि ढाडी, रागी और कविशर हमें अपने इतिहास, भाषा, मूल्यों और संस्कृति से जोड़ते हैं। विशेषकर नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने में उनका बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि हम श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष मना रहे हैं, इसलिए हम सभी का कर्तव्य है कि उनके बारे में कम से कम एक पुस्तक अवश्य पढ़ें। इसी उद्देश्य से विभागीय कर्मचारियों को ‘इति जिनि करी’ पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

तकनीक सुविधा दे सकती है, संबंध नहीं

अपने संबोधन में सतिंदरपाल सिंह सिद्धवां ने कहा कि गूगल सर्च और एआई मानव संबंधों और आपसी मेल-मिलाप का विकल्प नहीं बन सकते। तकनीक जीवन को सुविधाजनक बना सकती है, लेकिन प्रेम, अपनापन और साझेदारी पैदा नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता, क्योंकि वे जीवन जीने की कला सिखाती हैं और रिश्तों की समझ विकसित करती हैं।

उन्होंने अपने गायन सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा किताबों और अखबारों को अपना साथी बनाए रखा, जिससे मंच पर बोलने और प्रस्तुतियां देने में निरंतर सुधार हुआ और उन्हें लोगों का भरपूर प्यार मिला। उन्होंने कहा कि दुनिया जोड़ने वालों को याद रखती है, तोड़ने वालों को नहीं, और किताबें समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं।

उन्होंने नई पीढ़ी से अपील की कि तकनीक के साथ-साथ पढ़ने की आदत भी बनाए रखें। अंत में उन्होंने ‘जग जंक्शन रेलां दा…’ कविशरी गाकर अपना व्याख्यान समाप्त किया।

कार्यक्रम के अंत में भाषा विभाग की ओर से सतिंदरपाल सिंह सिद्धवां को शॉल और पुस्तकों का सेट भेंट कर सम्मानित किया गया। मंच संचालन शोध अधिकारी डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने किया।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक चंदनदीप कौर, सहायक निदेशक अमरिंदर सिंह, जसप्रीत कौर, सुरिंदर कौर सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।

चित्र: स. जसवंत सिंह ज़फर, सतिंदरपाल सिंह सिद्धवां को सम्मानित करते हुए।

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