नई दिल्ली, 03 फरवरी 2026: भारत-चीन सीमा टकराव को लेकर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के संदर्भ में लोकसभा में लगातार कई दिनों तक चले हंगामे के बाद मंगलवार को कांग्रेस के आठ सांसदों को सदन में कथित अनुचित व्यवहार के कारण निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इस मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग कर रहा था।
यह विवाद ‘कारवां’ मैगजीन में प्रकाशित एक लेख से जुड़ा है, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के अंशों का उल्लेख किया गया था। लेख में संकेत दिया गया था कि वर्ष 2020 में भारत और चीन के बीच हुए टकराव के दौरान राजनीतिक नेतृत्व असमंजस की स्थिति में नजर आया था। इसी संदर्भ को लेकर लोकसभा में विपक्ष ने सवाल उठाए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने नरवणे की उस आत्मकथा के अंशों को लेकर सरकार को घेरा, जो जनवरी 2024 में प्रकाशित होने वाली थी। बताया गया कि दिसंबर 2023 में इसका एक अंश सामने आने के बाद पुस्तक का प्रकाशन टाल दिया गया था, क्योंकि इसे सेना की औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली थी। पिछले वर्ष अक्टूबर में जनरल नरवणे ने भी कहा था कि उनकी पुस्तक की समीक्षा अभी सेना द्वारा की जा रही है।
इस मुद्दे पर दो दिनों तक सदन में तीखी बहस और हंगामा होता रहा, जिसके बाद स्पीकर ने कार्रवाई करते हुए आठ कांग्रेस सांसदों को निलंबित कर दिया। निलंबन के फैसले के बाद विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश बताया, जबकि सरकार का कहना है कि सदन की मर्यादा भंग करने पर यह कदम उठाया गया।






