पटियाला, 19 नवंबर ( ) — नगर निगम पटियाला की आज हुई अहम एफ एंड सी.सी. की बैठक में शहर के विभिन्न विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए 5286 लाख रुपये का बजट पास कर दिया गया। बैठक के दौरान मेयर कुंदन गोगिया, निगम कमिश्नर परमजीत सिंह IAS, सीनियर डिप्टी मेयर हरिंदर कोहली, डिप्टी मेयर जगदीप जग्गा, सहायक कमिश्नर रवदीप सिंह, इंजीनियर जतिंदर पाल सिंह, इंजीनियर राजिंदर चोपड़ा, सुपरिटेंडेंट संजीव गर्ग, कृष्ण कुमार पी.ए. कमिश्नर विशेष रूप से मौजूद थे।
बजट के तहत शहर में चार दर्जन से अधिक प्रमुख प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई। इनमें वार्ड 1, 2, 3, 5 और 7 में सड़कों के निर्माण के लिए लाखों रुपये जारी किए गए। वार्ड 24 और 26 में ड्रेनेज, पानी सप्लाई और सैनिटेशन से संबंधित कई पेंडिंग प्रोजेक्ट्स को भी हरी झंडी मिली। इसके साथ ही वार्ड 44, 48, 55 और 60 में सड़कों, स्ट्रीट लाइटों और नई पाइपलाइनों के कार्यों के लिए भी राशि जारी की गई।
बैठक के दौरान मेयर कुंदन गोगिया ने कहा कि जनता के टैक्स का हर पैसा जनता की भलाई पर ही खर्च किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नगर निगम के विकास कार्य पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पटियाला निवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए विकास कार्यों की गति तेज़ करना ज़रूरी था। इसलिए बजट को तुरंत मंज़ूरी देकर नवंबर से ही काम शुरू करने के आदेश जारी किए गए हैं। कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि सभी कार्य मानक अनुरूप और समय पर पूरे किए जाएं, अन्यथा ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
काउंसलरों को टैब देने पर कमिश्नर परमजीत सिंह ने कहा कि यह फैसला शहरी प्रशासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा। टैब से काउंसलर मीटिंग एजेंडा, फाइलें, बिल और प्रोजेक्ट रिपोर्टें तुरंत देख सकेंगे, जिससे कागज़ी कार्रवाई कम होगी और समय बचेगा। विकास कार्यों की निगरानी भी आसान होगी क्योंकि साइट की फोटो, वीडियो और रिपोर्ट तुरंत अपलोड की जा सकेंगी। इस डिजिटल व्यवस्था से निर्णय लेने की गति व कार्यक्षमता दोनों बढ़ेंगी।
आरएमसी सड़कों के बारे में
इंटरलॉक टाइलों से कैसे बेहतर हैं आरएमसी सड़कें (रेडी मिक्स कंक्रीट रोड)
यह एक विशेष प्रकार का कंक्रीट है जो निर्माण स्थल की बजाय एक केंद्रीकृत बैचिंग प्लांट में तैयार किया जाता है। इसमें सीमेंट, पानी, रेत और बजरी को एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है। तैयार होने के बाद इसे ट्रांज़िट मिक्सर ट्रकों से सीधे निर्माण स्थल पर पहुंचाया जाता है, जहां यह तुरंत उपयोग के लिए तैयार रहता है।
यह टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाली सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होता है, जैसे—राष्ट्रीय राजमार्ग, शहरी सड़कें और भारी ट्रैफिक वाले औद्योगिक क्षेत्र। बड़े भवनों, पुलों, बांधों और फाउंडेशन के निर्माण में भी इसकी व्यापक उपयोगिता है।
तकनीकी मानकों के अनुसार आरएमसी सड़कों की उम्र 20–30 वर्ष होती है, जबकि इंटरलॉक टाइलों की औसत उम्र करीब 5 वर्ष मानी जाती है। आरएमसी सड़कें भारी ट्रैफिक और बड़े वाहनों का भार आसानी से सहन करती हैं। वहीं, टाइलें मध्यम या हल्के ट्रैफिक के लिए उचित होती हैं, पर भारी वाहनों के नीचे इनके जोड़ खुलने की संभावना रहती है।
इंटरलॉक टाइलों की सतह आरएमसी सड़कों जितनी समतल नहीं होती, और चलते समय थोड़ी ऊंच-नीच महसूस होती है। टाइलों के जोड़ से पानी रिसने की संभावना भी रहती है, जबकि आरएमसी में ऐसा नहीं होता।
इसलिए किसी भी क्षेत्र में किस प्रकार की सड़क बनाई जाए, यह वहां की ट्रैफिक लोड, बजट और मौजूदा परिस्थितियों को देखकर तय किया जाता है।






